117 नाम एक झटके में साफ! बिलासपुर की वोटर लिस्ट में ‘साइलेंट ऑपरेशन’ का आरोप, सियासत में भूचाल
बिलासपुर। बेलतरा विधानसभा के चांटीडीह क्षेत्र (बूथ 191-193, वार्ड 55-56) में 117 मुस्लिम मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के बाद राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। जिन मतदाताओं के नाम कटे, वे 50 साल से अधिक समय से क्षेत्र में निवासरत बताए जा रहे हैं। आधार बताया गया “यहां नहीं रहते”।
मामला सामने आते ही कांग्रेस ने इसे “टारगेटेड वोटर क्लीनिंग” करार देते हुए बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
जानकारी के मुताबिक विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फॉर्म-7 के जरिए 117 नामों को मृत या लापता बताकर आपत्ति दर्ज कराई गई। यह फॉर्म किसी “प्राण” नामक व्यक्ति द्वारा जमा किया गया।
कांग्रेस का आरोप है कि यह कोई सामान्य आपत्ति नहीं, बल्कि सुनियोजित कार्रवाई है। हालांकि अभी तक इस व्यक्ति की राजनीतिक संबद्धता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बीएलओ की प्रारंभिक फिजिकल वेरिफिकेशन में सभी 117 मतदाता जीवित पाए गए। पंचनामा बनाकर रिपोर्ट अधिकारियों को भेजी गई।
जिला निर्वाचन अधिकारी और कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जांच का आश्वासन दिया है। उच्चस्तरीय जांच की मांग अभी लंबित है। यानी जिनको “गायब” बताया गया, वे घर पर ही मिले।
पूर्व जिला अध्यक्ष विजय केशरवानी पीड़ित मतदाताओं के साथ कलेक्टर से मिले। कलेक्टोरेट में प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा गया।
कांग्रेस का आरोप है कि:
अल्पसंख्यक और कथित तौर पर विपक्ष समर्थक वोटरों को टारगेट किया जा रहा है। करीबी चुनावी क्षेत्रों में वोट संतुलन बिगाड़ने की कोशिश हो रही है।
कांग्रेस का दावा है कि बिहार, यूपी, राजस्थान और असम सहित कई राज्यों में भी फॉर्म-7 के जरिए मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की शिकायतें सामने आई हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित राज्यों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई हैं और कई मामलों में प्रशासन ने तकनीकी या प्रक्रिया संबंधी कारण बताए हैं।
बड़ा राजनीतिक सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही है?
या चुनावी गणित साधने की कोशिश?
फॉर्म-7 भरने वाला “प्राण” कौन है?
जांच के नतीजे तय करेंगे कि यह गलती थी या रणनीति।