कोरबा में कबाड़ चोरों का आतंक: गेवरा–पेंड्रा नई रेल लाइन से 2 करोड़ का लोहा चोरी, बड़े नेटवर्क की आशंका
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में कबाड़ चोरों ने एक बार फिर सरकारी परियोजनाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। गेवरा–पेंड्रा नई रेल लाइन परियोजना से करीब 2 करोड़ रुपये मूल्य का लोहा चोरी हो जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कुसमुंडा से जटगा–कुचेना के बीच रेल पटरी, प्लेटें और हैवी मशीनरी के कई अहम हिस्से गायब पाए गए हैं। यह घटना हाल ही में सामने आई ब्रिज चोरी की वारदात के बाद हुई है, जिससे इलाके में चोरों का हौसला और ज्यादा बढ़ गया है।
जानकारी के मुताबिक, कबाड़ चोरों ने पूरी योजना के साथ वारदात को अंजाम दिया।
चोरों ने गैस कटर की मदद से रेल पटरी और प्लेटों को काटा।
भारी मात्रा में लोहे की सामग्री को ट्रकों या अन्य साधनों से बाहर ले जाया गया।
चोरी की वारदात गेवरा–पेंड्रा रोड रेल लाइन विस्तार प्रोजेक्ट की अलग-अलग साइट्स पर हुई।
बताया जा रहा है कि लगभग 60 से 65 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में फैली साइट्स से चरणबद्ध तरीके से चोरी की गई, जिससे लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक का नुकसान हुआ है।
यह पहली बार नहीं है जब कोरबा जिले में इस तरह की चोरी हुई हो। इससे पहले भी:
निर्माणाधीन पुलों और सरकारी ढांचों से लोहा चोरी के मामले सामने आ चुके हैं।
कई स्थानों पर बीम, प्लेट और सरिया तक गायब मिले हैं।
इन घटनाओं से यह साफ हो रहा है कि कबाड़ चोर संगठित गिरोह के रूप में काम कर रहे हैं और सुनियोजित तरीके से सरकारी निर्माणाधीन साइट्स को निशाना बना रहे हैं।
इस बड़ी चोरी का सीधा असर गेवरा–पेंड्रा नई रेल लाइन परियोजना पर पड़ सकता है।
परियोजना की गति धीमी होने की आशंका है।
दोबारा सामग्री मंगाने में समय और अतिरिक्त खर्च लगेगा।
सुरक्षा इंतजामों पर भी अब सवाल उठने लगे हैं।
यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में अन्य परियोजनाएं भी खतरे में पड़ सकती हैं।
घटना की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
आसपास के कबाड़ व्यापारियों और संदिग्ध वाहनों की जानकारी जुटाई जा रही है।
यह भी जांच की जा रही है कि चोरी किया गया लोहा किसे और कहां बेचा गया।
पुलिस को आशंका है कि इसमें स्थानीय स्तर पर मदद भी मिल रही होगी।
लगातार हो रही चोरियों से स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। वहीं, करोड़ों की सरकारी संपत्ति चोरी होने के बाद प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है कि जल्द से जल्द चोरों को गिरफ्तार कर नेटवर्क का खुलासा किया जाए।
अब देखना होगा कि पुलिस इस संगठित कबाड़ चोरी गिरोह तक कब और कैसे पहुंचती है, क्योंकि यह मामला सिर्फ चोरी का नहीं, बल्कि सरकारी परियोजनाओं की सुरक्षा और जनता के पैसे की बर्बादी से जुड़ा हुआ है।