रायपुर। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में आयोजित स्कूल नेशनल अंडर-14 कबड्डी प्रतियोगिता खेल से ज्यादा विवादों की वजह से सुर्खियों में आ गई है। राजस्थान टीम ने मेजबान छत्तीसगढ़ पर ओवरएज खिलाड़ियों को खिलाने का गंभीर आरोप लगाते हुए टूर्नामेंट का बहिष्कार कर दिया और क्लोजिंग सेरेमनी में शामिल हुए बिना ही वापस लौट गई।
गौरतलब है कि 6 से 9 जनवरी तक चली इस प्रतियोगिता के दौरान छत्तीसगढ़ और राजस्थान के बीच मैच में विवाद भड़क उठा। राजस्थान टीम के कोच और अधिकारियों का आरोप है कि छत्तीसगढ़ की टीम में ऐसे खिलाड़ी उतारे गए जिनकी उम्र अंडर-14 की तय सीमा से कहीं ज्यादा थी।
राजस्थान टीम ने आपत्ति दर्ज कराते हुए खिलाड़ियों के आधार कार्ड, जन्मतिथि और पात्रता दस्तावेज दिखाने की मांग की, लेकिन उनका कहना है कि कोई रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया गया।
राजस्थान टीम के प्रबंधन का दावा है कि छत्तीसगढ़ टीम का एक खिलाड़ी 2002 जन्मवर्ष का है, जो इससे पहले हरियाणा फेडरेशन कप जैसी सीनियर प्रतियोगिता भी खेल चुका है। इसके बावजूद उसे अंडर-14 स्कूल नेशनल में खिलाया गया, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।
राजस्थान टीम के जनरल मैनेजर के अनुसार, उन्होंने स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SGFI) के पोर्टल पर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई और नियमानुसार फीस भी जमा की, लेकिन शिकायत की रिसिविंग नहीं दी गई।
मौके पर मौजूद कुछ अधिकारियों ने दुर्व्यवहार किया, इसी से आहत होकर राजस्थान टीम ने प्रतियोगिता छोड़ने का फैसला किया।
इस पूरे विवाद के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें मैच फिक्सिंग और फर्जी उम्र प्रमाण जैसे आरोप लिखे दिख रहे हैं। राजस्थान अधिकारियों का कहना है कि मैच के दौरान भी कई फैसले एकतरफा रहे।
टूर्नामेंट के अंत में छत्तीसगढ़ को विजेता घोषित कर दिया गया, लेकिन राजस्थान टीम के वॉकआउट और ओवरएज आरोपों के बाद इस जीत की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
इस प्रतियोगिता की निगरानी SGFI ऑब्जर्वर और दुर्ग संभाग संयोजक के पास थी। ऑब्जर्वर ने कहा कि शिकायत SGFI चेयरपर्सन कल्पना स्वामी तक पहुंच चुकी है और फैसला वही लेंगी।
वहीं कल्पना स्वामी ने कहा- राजस्थान टीम को प्रतियोगिता छोड़कर नहीं जाना चाहिए था। वे क्लोजिंग से पहले ही चले गए। हालांकि पूरे मामले की रिपोर्ट आने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
यह विवाद अब सिर्फ दो राज्यों की टीमों तक सीमित नहीं रहा।
उम्र सत्यापन की प्रक्रिया
SGFI की पारदर्शिता
स्कूल खेलों की निष्पक्षता,
इन सभी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए कड़े मेडिकल और बोन-एज टेस्ट अनिवार्य किए जाने चाहिए।
अब सभी की निगाहें SGFI की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं क्या वाकई ओवरएज खिलाड़ी खेले गए, या फिर यह मामला भी बाकी विवादों की तरह फाइलों में दब जाएगा?