भिलाई विधायक देवेंद्र यादव की सेहत लगातार गिर रही है…

भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के भिलाई स्टील प्लांट और उससे जुड़ी बसावट को बचाने के लिए चल रही ‘भिलाई नहीं बिकने देंगे’ मुहिम को पूरे छत्तीसगढ़ से जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। विधायक देवेंद्र यादव के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में अब सामाजिक संगठनों के साथ-साथ पूर्व मंत्री, विधायक और यूथ कांग्रेस भी खुलकर सामने आ गए हैं।

आज सिविक सेंटर स्थित पार्किंग स्थल ग्राउंड में चल रहे भिलाई सत्याग्रह के चौथे दिन आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे, पूर्व मंत्री जगतगुरु रुद्र गुरु, पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा, पूर्व मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी, विधायक कविता प्राण लहरें, कांग्रेस प्रवक्ता शैलेश नितिन त्रिवेदी, युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा, इन सभी नेताओं ने मंच से भिलाई की बसावट, सार्वजनिक संस्थानों और भिलाई स्टील प्लांट के निजीकरण के खिलाफ एकजुट होकर आवाज बुलंद की।

देवेंद्र यादव की बिगड़ती सेहत, को लेकर परिवार चिंतित है, लगातार उपवास पर बैठे विधायक देवेंद्र यादव की सेहत में गिरावट दर्ज की गई है। डॉक्टरों के अनुसार विधायक देवेंद्र यादव का बीपी बढ़ गया है, शुगर लेवल कम हो गया है, यूरिन में कीटोन्स बढ़े हुए हैं।

इस स्थिति को लेकर उनके बड़े भाई धर्मेंद्र यादव और परिजनों की चिंता बढ़ गई है। बावजूद इसके देवेंद्र यादव ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं बल्कि भिलाई की बसावट बचाने की है।

देवेंद्र यादव ने कहा कि बिना चर्चा किए, लिए गए निर्णय तानाशाही के प्रतीक होते हैं। मेरी लड़ाई बीएसपी प्रबंधन से नहीं है, न ही मैं राजनीति कर रहा हूं। मैं सत्ता में बैठे लोगों से आग्रह कर रहा हूं कि भिलाई को बचाने आगे आएं। मैं उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा हूं। उन्होंने बताया कि वे आज भी बीएसपी के डीआईसी महापात्रा से सार्थक चर्चा करना चाहते हैं, ताकि भिलाई की बसावट बचाई जा सके।

आज धरना स्थल पर- जसबीर सिंह चहल,भोजपुरी परिषद के प्रतिनिधि प्रभुनाथ बैठा,अपने-अपने समाज के साथ पहुंचे और आंदोलन को समर्थन दिया।

जसबीर सिंह चहल ने कहा कि 1955 में भिलाई इस्पात संयंत्र की स्थापना हुई। हमारे बुजुर्गों ने खून-पसीना बहाकर इस प्लांट को खड़ा किया। भिलाई स्टील प्लांट का निजीकरण नहीं होना चाहिए। सेक्टर-9 अस्पताल, मैत्रीबाग और स्कूलों का निजीकरण भी स्वीकार्य नहीं है। सिख समाज देवेंद्र यादव के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है।

प्रभुनाथ बैठा ने भी भोजपुरी समाज की ओर से आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। भिलाई नहीं बिकने देंगेष अभियान को सोशल मीडिया पर भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। यह मुहिम ट्विटर पर ग्लोबल ट्रेंड में शामिल रही।

युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा ने ऐलान किया कि 24 दिसंबर को पूरे छत्तीसगढ़ में आंदोलन होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और सेल प्रबंधन के पुतले जलाए जाएंगे, सभी जिलों में कलेक्टोरेट कार्यालयों का घेराव किया जाएगा, उन्होंने कहा कि यह लड़ाई पब्लिक सेक्टर यूनिट और भिलाई की पहचान बचाने की है।

पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा ने कहा कि जो लोग भिलाई की बसावट बचाने के लिए अनशन कर रहे हैं, उनसे चर्चा करने के बजाय प्रबंधन हठधर्मिता दिखा रहा है। यह साफ दर्शाता है कि वे किस तरह दबाव में काम कर रहे हैं।

पूर्व मंत्री जगतगुरु रुद्र गुरु ने कहा कि‌ मैं अपने छोटे भाई देवेंद्र के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा हूं। भिलाईवासियों को भरोसा दिलाता हूं कि हम भिलाई को बिकने नहीं देंगे।

आज धरना स्थल पर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से
पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा, पूर्व मंत्री गुरु रुद्र कुमार, बिलाईगढ़ विधायक कमला लहरें, पूर्व राज्यमंत्री बीड़ी कुरैशी, कांग्रेस प्रवक्ता शैलेश नितिन त्रिवेदी, सतनाम सिंह, पूर्व विधायक अरुण वोरा, पूर्व महापौर आर.एन. वर्मा, महापौर नीरज पाल, लालचंद वर्मा, राजेंद्र सिंह परगनिहा, योगेश सोनी, टी. जोगा राव, लक्ष्मीपति राजू, राजेंद्र शर्मा, रमेश पाल, हीरा बॉक्स, बी.पी. मनोज पांडे, श्यामलाल साहू, जयप्रकाश नायर, संजय साहू (इंटक ठेका श्रमिक), फौजी अरुण सिसोदिया, गुरलीन सिंह, रौनक सचदेव, संदीप निरंकारी, बंटी साहू, डी. कामराजू, शीजू एंथनी, गुड्डू खान, अली हुसैन सिद्दीकी, दर्शन सिंह, निर्मल सिंह धारीवाल, इतवारी देवांगन, साकेत चंद्राकर, एकांश बंछोर, आदित्य सिंह, सुमित पावर, आशीष यादव, शरद मिश्र, करीम खान, सिखा रॉय, अरविंद राय, निरंजन बिसाई, सज्जाद, इमरान अहमद, चंद्रकला तारंग, एम. लक्ष्मी, कृष्णा पात्रे, नैना रमेश, लिसी स्मिथ, अरुणा राव, अज्जू अहमद चौहान, अभय सिंह, अमित उपाध्याय, शाहिद खान, अनुराग साहू सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और महिलाएं उपस्थित रहीं।

खास बात ये है कि अलग-अलग क्षेत्रों से महिलाओं के जत्थे भी लगातार धरना स्थल पर पहुंच रहे हैं, जिससे आंदोलन को और मजबूती मिल रही है।

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