बेंगलुरु के जंगल में सफाई करने उतरे ‘बिट्टू तबाही’, कचरे के नीचे जो मिला उसे देखकर रह गए हैरान…

दो टन से ज्यादा कचरा हटाया, प्लास्टिक के साथ मेडिकल और पोल्ट्री वेस्ट भी मिला; बोले- लोगों में सिविक सेंस की कमी चिंताजनक

बेंगलुरु, 13 सितंबर 2026। मध्य प्रदेश के युवा पर्यावरण कार्यकर्ता सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिन्हें सोशल मीडिया पर ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से जाना जाता है, अब बेंगलुरु में सफाई अभियान को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने शनिवार को बनशंकरी छठवें स्टेज स्थित तुराहल्ली जंगल में स्वयंसेवकों और स्थानीय लोगों के साथ ‘क्लीन अप तुराहल्ली’ अभियान में हिस्सा लिया। करीब चार घंटे चले इस अभियान में दो टन से अधिक कचरा हटाया गया।

सफाई के दौरान टीम को सिर्फ सामान्य प्लास्टिक कचरा ही नहीं मिला, बल्कि पोल्ट्री वेस्ट, मेडिकल कचरा, सैनिटरी वेस्ट और अन्य गंदगी भी मिली। कचरे के ढेर के नीचे कुत्तों के शव भी पाए गए। बड़े पैमाने पर जमा कचरे को हटाने के लिए बैकहो मशीन की मदद लेनी पड़ी।

‘सिविक सेंस’ की कमी पर जताई चिंता

बिट्टू तबाही ने अभियान के दौरान कहा कि देश में कई जगह लोगों में सिविक सेंस की कमी दिखाई देती है। अपने आसपास की सफाई को प्राथमिकता नहीं देने की आदत पर्यावरण के लिए बड़ी समस्या बन रही है।

उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा था कि तुराहल्ली जंगल में मुख्य रूप से प्लास्टिक कचरा ही होगा, लेकिन सफाई शुरू करने के बाद स्थिति कहीं ज्यादा गंभीर नजर आई। प्लास्टिक की परतों के नीचे मेडिकल कचरा और कुत्तों के शव मिलने से वह हैरान रह गए।

बेंगलुरु की हरियाली देखकर भी निराश हुए बिट्टू

बेंगलुरु को देश की टेक्नोलॉजी राजधानी और हरियाली के लिए जाना जाता है। ऐसे में तुराहल्ली इलाके की स्थिति देखकर बिट्टू ने निराशा जताई। उनका कहना था कि उन्हें उम्मीद थी कि शहर के ग्रीन स्पेस अपेक्षाकृत साफ होंगे, लेकिन सड़कों और जंगल के आसपास पुराने कचरे के ढेर दिखाई दिए।

उन्होंने यह भी कहा कि पूरी जगह को हाथों से साफ करना संभव नहीं हो पाया और भारी कचरे को हटाने के लिए मशीन की जरूरत पड़ी। पर्यावरण के प्रति लोगों की लापरवाही पर उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर पेड़ों और जंगलों में ब्लूटूथ या वाई-फाई की सुविधा होती, तो शायद लोग उनकी ओर भी ज्यादा ध्यान देते।

पर्यावरणविदों ने भी लिया अभियान में हिस्सा

इस सफाई अभियान में पर्यावरणविद् एएन येल्लप्पा रेड्डी और इंडिया प्लॉग रन के रामकृष्ण गणेशन भी शामिल हुए। रेड्डी ने बिट्टू तबाही के प्रयासों की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि उनके अभियान से युवा पर्यावरण और प्रदूषण को लेकर ज्यादा गंभीर होंगे।

उन्होंने यह भी बताया कि करीब चार दशक पहले तुराहल्ली क्षेत्र चार बड़े जलाशयों के लिए जलसंचयन क्षेत्र के रूप में महत्वपूर्ण था।

कौन हैं ‘बिट्टू तबाही’?

सुरेंद्र सिंह चौधरी मध्य प्रदेश के छात्र हैं और सोशल मीडिया पर ‘बिट्टू तबाही’ नाम से पहचान बना चुके हैं। इसी साल 26 जनवरी से उन्होंने अजनार नदी की सफाई का अभियान शुरू किया था। नदी में जमा कचरे को देखकर उन्होंने खुद सफाई शुरू की और बाद में उनके दोस्त भी इस अभियान से जुड़े।

सोशल मीडिया पर उनके 17 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। वह अपने और दोस्तों के सफाई अभियानों के वीडियो साझा करते रहते हैं। कई बार वह अकेले भी सफाई अभियान चलाते हैं। अजनार नदी की सफाई के बाद अब बेंगलुरु के तुराहल्ली जंगल में उनके अभियान ने फिर लोगों का ध्यान खींचा है।

संदेश साफ है: शहर कितना भी आधुनिक क्यों न हो, अगर लोग अपने आसपास कचरा फैलाने से नहीं बचेंगे तो केवल नगर निकायों के भरोसे स्वच्छता की समस्या का समाधान संभव नहीं है। तुराहल्ली की स्थिति इसी चुनौती की ओर इशारा करती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *