राजिम कुंभ में अपमान का तांडव: कलाकार भूखे-प्यासे, प्रशासन पर फटे बीजेपी विधायक रोहित साहू…

कलाकारों को खाना-पानी नहीं, प्रशासन पर भड़के बीजेपी विधायक रोहित साहू

राजिम। राजिम कुंभ कल्प मेला 2026 में अव्यवस्थाओं को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। गरियाबंद से बीजेपी विधायक रोहित साहू 8 फरवरी को उस वक्त भड़क उठे, जब राज्यस्तरीय कलाकारों को कार्यक्रम के बाद डेढ़ घंटे तक भूखा-प्यासा बैठाए जाने की जानकारी सामने आई। इस घटना ने मेला प्रबंधन और जिला प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राजिम कुंभ के मुख्य मंच पर प्रस्तुति देने के बाद आरु साहू सहित अन्य कलाकारों को इवेंट कंपनी की ओर से न तो भोजन दिया गया और न ही पानी। कलाकार इधर-उधर मदद के लिए भटकते रहे, लेकिन मौके पर मौजूद अफसरों और आयोजकों में से किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली।

मौके पर पहुंचे विधायक रोहित साहू ने जब देखा कि अधिकारी केवल टहल रहे हैं और कलाकारों की सुध लेने वाला कोई नहीं है, तो वे भड़क गए। उन्होंने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा-
सरकार की धनिया बो रहे हो, और कलाकारों की बेइज्जती हो रही है।

स्थिति बिगड़ती देख विधायक ने खुद पहल की और कलाकारों को नजदीकी रेस्टोरेंट ले जाकर भोजन कराया।

विधायक ने कहा- राजिम कुंभ केवल एक आयोजन नहीं, छत्तीसगढ़ की आस्था और संस्कृति का प्रतीक है। इसकी गरिमा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने जिला प्रशासन और इवेंट कंपनी को चेतावनी दी कि ऐसी लापरवाही दोबारा हुई तो कड़ी कार्रवाई होगी।
कलाकारों को सम्मान दो, वरना सरकार की इज्जत पर बट्टा लगेगा।

इस विवाद के साथ मेला प्रबंधन की अन्य खामियां भी सामने आई हैं-
पेयजल और शौचालय की कमी: लाखों श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं नाकाफी

पत्रकारों से बदसलूकी और मीडियाकर्मियों को प्रवेश में रोके जाने, भुगतान सत्यापन के बिना फंड जारी होने के मुद्दों को लेकर सोमवार को स्थानीय लोगों ने धरना भी दिया

बताया जा रहा है कि मेला शुरू होने से पहले ही कई विवाद चल रहे थे, जिनमें थूक जिहाद जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। ताजा घटना ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर और दबाव बढ़ा दिया है।

राजिम कुंभ छत्तीसगढ़ सरकार के लिए प्रतिष्ठा का विषय माना जाता है। ऐसे में सत्तारूढ़ दल के विधायक का खुला विरोध विपक्ष को मुद्दा दे सकता है। विधायक रोहित साहू ने जिला कलेक्टर और एसपी से जवाब तलब किया है।
मेला 18 फरवरी तक चलना है, ऐसे में व्यवस्थाओं को तुरंत सुधारने की मांग तेज हो गई है।

कलाकार संगठनों ने मामले में सरकारी हस्तक्षेप की मांग की, स्थानीय लोगों ने इवेंट कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग उठाई, सरकार द्वारा जांच के आदेश दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक आयोजनों की साख पर असर डालता दिख रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *