रिश्वत का खेल बेनकाब: सिस्टम के अंदर बैठा पूरा नेटवर्क उजागर 70 लाख की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार, केस दबाने के बदले 1.5 करोड़ की डिमांड, चौराहे पर 70 लाख लेते सुपरिटेंडेंट गिरफ्तारकेस दबाने के बदले 1.5 करोड़ की डिमांड…

झांसी। झांसी में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। GST चोरी के मामलों में राहत देने और केस बंद करने के बदले 1.5 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर लगा है। ACB की ट्रैप कार्रवाई में CGST सुपरिटेंडेंट को 70 लाख रुपए लेते हुए शहर के एक चौराहे से रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद पूरा रिश्वत नेटवर्क उजागर हो गया।

झांसी की जय दुर्गा हार्डवेयर सहित कुछ फर्मों पर GST चोरी को लेकर CGST विभाग की जांच चल रही थी। जांच आगे बढ़ने पर भारी जुर्माने और कानूनी कार्रवाई की आशंका के बीच फर्म प्रतिनिधियों से संपर्क किया गया। आरोप है कि जांच में राहत देने और फाइलें मैनेज करने के बदले मोटी रकम की मांग रखी गई।

जांच एजेंसियों के अनुसार, GST विशेषज्ञ वकील नरेश कुमार गुप्ता ने फर्म मालिकों से संपर्क कर सौदेबाजी शुरू की। धीरे-धीरे डील 1.5 करोड़ रुपए पर तय हुई। इस पूरी डिमांड के पीछे डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी (IRS, 2016 बैच) की भूमिका सामने आई है, जिन्हें जांच एजेंसियां इस पूरे मामले की मास्टरमाइंड मान रही हैं।

कौन निभा रहा था क्या भूमिका

प्रभा भंडारी डिप्टी कमिश्नर, CGST झांसी – आरोप है कि केस बंद करने और कार्रवाई रोकने के निर्देश उनके स्तर से दिए जा रहे थे। रिश्वत की कुल डिमांड उन्हीं के नाम पर तय हुई।

अनिल तिवारी सुपरिटेंडेंट, CGST झांसी –
फर्मों से सीधे संपर्क और रकम वसूलने की जिम्मेदारी इसी के पास थी। ACB ने इसे 70 लाख रुपए लेते हुए झांसी शहर के एक चौराहे पर गिरफ्तार किया।

अजय कुमार सुपरिटेंडेंट, CGST झांसी –
अनिल तिवारी के साथ मिलकर फाइलों और दस्तावेजों को मैनेज करने का आरोप। ट्रैप के बाद इसे भी गिरफ्तार किया गया।

नरेश कुमार गुप्ता GST विशेषज्ञ वकील –
अफसरों और फर्म मालिकों के बीच मध्यस्थ की भूमिका। पूछताछ में इसके टूटने के बाद कई अहम जानकारियां सामने आई।

राजू मंगतानी मालिक जय दुर्गा हार्डवेयर GST चोरी से जुड़े मामले में राहत पाने के लिए रिश्वत देने वाला पक्ष। ACB ट्रैप में यही मुख्य शिकायतकर्ता और टारगेट था।

रिश्वत की मांग से परेशान फर्म प्रतिनिधि ने ACB से शिकायत की। योजना के तहत तय रकम लेकर आरोपी सुपरिटेंडेंट को झांसी शहर में बुलाया गया। जैसे ही 70 लाख रुपए का लेन-देन हुआ, ACB टीम ने मौके पर पहुंचकर आरोपी को रंगे हाथ पकड़ लिया। इसके बाद अन्य आरोपियों के ठिकानों पर दबिश दी गई।

जांच में ACB और संबंधित एजेंसियां अब कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल चैट फाइल मूवमेंट,श और बैंक लेन-देन की जांच कर रही हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इससे पहले भी इसी तरह से अन्य मामलों में वसूली की गई थी।

बड़ा सवाल  ये भी है कि क्या CGST झांसी में यह भ्रष्टाचार का एकमात्र मामला है, या फिर पूरे सिस्टम में रिश्वत का यह तरीका लंबे समय से चल रहा था? जांच एजेंसियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे संभव हैं।

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