रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने संगठनात्मक मजबूती और चुनावी तैयारी को सुदृढ़ करने के लक्ष्य के साथ पहली बार भाजपा के संगठनात्मक मॉडल की तर्ज पर मंडल/जिलेवार अध्यक्षों की विस्तृत सूची जारी की है, जो पार्टी के “संगठन सृजन अभियान” का अहम हिस्सा है। इससे पार्टी के ग्रासरूट स्तर पर चुनावी तैयारियों को मजबूत करने का संकेत मिलता है, ताकि भाजपा को प्रदेश में कड़ी टक्कर दी जा सके।
कांग्रेस ने पहली बार जिलों के हिसाब से मंडल/जिला अध्यक्षों की विस्तृत लिस्ट जारी करते हुए स्थानीय नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। इससे संगठन की नींव को मजबूती मिलेगी और कार्यकर्ताओं में नया उत्साह फैलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सूची में कुल 41 जिला अध्यक्षों के नाम शामिल हैं, जिनमें प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के स्थानीय और अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है –
बालोद: चंद्रेश कुमार हिरवानी
बलौदाबाजार: सुमित्रा
बलरामपुर: हरिहर प्रसाद यादव
बस्तर ग्रामीण: प्रेम शंकर शुक्लाभिलाई सिटी: मुकेश चंद्राकर
भिलाई सिटी: मुकेश चंद्राकर
बीजापुर: लालू राठौर
बिलासपुर सिटी: सिधांशु मिश्रा
कोंडागांव: रवि घोष
कोरबा सिटी: मुकेश राठौर
महासमुंद: द्वारिकाधीश यादव
सूरजपुर: शशि सिंह कोरम
सरगुजा: बालकृष्ण पाठक
नारायणपुर, रायगढ़, धमतरी, जगदलपुर आदि जिलों में भी स्थानीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है।
यह कदम छत्तीसगढ़ कांग्रेस की 2026-27 के चुनावी अभियान की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। भाजपा के संगठनात्मक मॉडल से प्रेरित होकर यह पहल उठाई गई है, ताकि ज़मीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ मज़बूत हो और कार्यकर्ता स्थानीय मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठा सकें। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बढ़ने की उम्मीद है।
जानकारों के अनुसार यह रणनीति जाति संतुलन, युवा नेतृत्व और क्षेत्रीय समीकरण को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जिससे चुनावी माहौल में कांग्रेस को बढ़त मिल सके।
अपेक्षित असर
संगठनात्मक मजबूती: मंडल और जिला स्तर पर सक्रिय नेतृत्व से चुनावी तैयारियां और तेज होंगी।
कार्यकर्ता उत्साह: स्थानीय नेतृत्व की नियुक्तियों से जमीनी स्तर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश और प्रतिबद्धता बढ़ेगी।
भाजपा को चुनौती: भाजपा के सुदृढ़ संगठनात्मक ढांचे को देखते हुए कांग्रेस अब संगठन के मोर्चे पर बराबर की लड़ाई लड़ने के प्रयास में है।