अतिरिक्त जमीन का दावा पड़ा भारी, अब लाखों की रिकवरी…

बिलासपुर में 25 डिसमिल जमीन का मुआवजा पहले मिला 1.43 करोड़, सत्यापन में रकबा बढ़कर करीब 28 डिसमिल निकला तो बदला मूल्यांकन का नियम

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सकरी गांव में जमीन अधिग्रहण से जुड़ा एक मामला राजस्व नियमों के पेच में उलझ गया है। खसरा नंबर 407/5 के भू-स्वामियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर करीब तीन से चार डिसमिल अतिरिक्त जमीन अधिग्रहित होने का दावा किया था। हाई कोर्ट के निर्देश पर हुए भौतिक सत्यापन में अतिरिक्त रकबा प्रभावित होना पाया गया, लेकिन इसके साथ ही जमीन के मूल्यांकन का नियम भी बदल गया।

जानकारी के मुताबिक, एनएच निर्माण के लिए भू-स्वामियों की करीब 25 डिसमिल जमीन अधिग्रहित की गई थी। इस जमीन के लिए उन्हें छोटे आवासीय-व्यावसायिक भूखंड की दर के आधार पर करीब 1.43 करोड़ रुपये का मुआवजा पहले ही दिया जा चुका था।

इसके बाद भू-स्वामियों ने दावा किया कि वास्तविक रूप से करीब तीन से चार डिसमिल अतिरिक्त जमीन भी अधिग्रहण की जद में आई है। मामले में हाई कोर्ट के निर्देश के बाद तहसीलदार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की संयुक्त टीम ने मौके पर भौतिक सत्यापन किया।

25 डिसमिल की सीमा पार होते ही बदल गया गणना का आधार

भौतिक सत्यापन में कुल रकबा करीब 28 डिसमिल पाया गया। यहीं से मामला राजस्व नियमों के पेच में फंस गया। रिपोर्ट के अनुसार, 25 डिसमिल तक जमीन का मूल्यांकन वर्गफुट या खुदरा डिसमिल की दर से किया जाता है। लेकिन रकबा 25 डिसमिल से अधिक होने पर पूरे भूखंड का मूल्यांकन थोक हेक्टेयर गाइडलाइन दर से किए जाने का प्रावधान लागू हो जाता है।

हेक्टेयर की यह दर वर्गफुट या खुदरा डिसमिल की दर की तुलना में काफी कम होती है। ऐसे में अतिरिक्त जमीन मिलने की स्थिति में मुआवजा बढ़ने के बजाय पहले से किए गए भुगतान का मूल्यांकन ही बदल गया।

1.43 करोड़ के भुगतान पर अब रिकवरी की तैयारी

मूल्यांकन में बदलाव के बाद कुल मुआवजा राशि पहले भुगतान किए गए 1.43 करोड़ रुपये से काफी कम निकल रही है। इसी आधार पर एसडीएम न्यायालय ने एनएचएआई को पुनर्मूल्यांकन करने के निर्देश दिए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, पुनर्मूल्यांकन के बाद पहले भुगतान की गई राशि में से करीब 50 से 70 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि की रिकवरी एनएचएआई द्वारा की जा सकती है।

अतिरिक्त जमीन के दावे ने बदल दिया पूरा गणित

मामले में खास बात यह है कि भू-स्वामियों की ओर से अतिरिक्त रकबे का दावा किए जाने के बाद मौके पर जमीन का क्षेत्रफल बढ़ा जरूर, लेकिन 25 डिसमिल की सीमा पार होने से मूल्यांकन का आधार बदल गया। इसके चलते मुआवजे की गणना नए सिरे से करनी पड़ रही है।

अब एनएचएआई और राजस्व विभाग के स्तर पर पुनर्मूल्यांकन के आधार पर यह तय होगा कि भू-स्वामियों को कितनी राशि देय है और पहले भुगतान की गई राशि में से कितनी रकम वापस ली जानी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *