कांकेर। यह घटना छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के बड़े तेवड़ा गाँव (ग्राम पंचायत आमाबेड़ा) में हुई, जहाँ धर्मांतरण से जुड़ी संवेदनशील सामाजिक स्थिति तनाव का कारण बनी।
गौरतलब है कि गांव के सरपंच रजमन सलाम के पिता चमरू राम (70) का निधन हुआ था। उनके परिवार ने उन्हें ईसाई रीति से गाँव में ही कफन-दफन किया। कई ग्रामीणों को यह गाँव की परंपरागत रीति-रिवाज़ के खिलाफ लगा, क्योंकि वे मानते हैं कि ईसाई रीति से दफन को गाँव में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
दुर्गू टोली में दो समुदाय आमने-सामने आ गए: परंपरागत आदिवासी ग्रामीण जो परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार चाहते थे । वहीं ईसाई धर्म अपनाने वाला परिवार समुदाय जो अपनी धार्मिक रीति से अंतिम संस्कार करना चाहता था
ग्रामीणों की भीड़ ने दफ़न की गयी कब्र को तोड़ दिया और शव बाहर निकालने की कोशिश की। भीड़ में उग्र प्रदर्शन हुआ और गाँव के चर्च में तोड़फोड़ व आग लगाने की कोशिश की गई। इसी दौरान झड़प में प्रशासनिक अधिकारी सहित एडिशनल एसपी सहित कई लोग घायल हुए।
पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचे और विवाद को टालने की कोशिश की, लेकिन स्थिति बिगड़ गयी। हिंसा फैलने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया ताकि उग्र भीड़ को काबू में रखा जा सके।
स्थानीय प्रशासन ने दफ़न किये गए शव को कब्र से निकालकर गांव के बाहर भेजने का निर्णय लिया, ताकि तनाव को कम किया जा सके।
स्थानीय तनाव बढ़ता देख प्रशासन ने संभावित व्यवधान के लिए धारा 144 लागू कर दी है और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
यह विवाद धर्मांतरण, अंतिम संस्कार की परंपराओं, आदिवासी समुदाय की सामाजिक मान्यताओं और स्थानीय कानून-व्यवस्था जैसे जटिल मुद्दों के बीच उभरा है – जिससे इलाके में गहरा तनाव और सांप्रदायिक चिंता बनी हुई है।