कोरबा, जांजगीर और महासमुंद में टोकन न मिलने से किसानों में हताशा, कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए, प्रशासन ने सुधार का भरोसा दिया
कोरबा। किसान: बैसाखू मरकाम, ग्राम झांझ निवासी धान बिक्री के लिए टोकन न मिलने के कारण तहसील कार्यालय के सामने जहरीला पदार्थ पी लिया।
उन्हें गंभीर हालत में बिलासपुर रेफर किया गया।
प्रशासनिक कारण: ऑनलाइन टोकन प्रणाली और एंट्री प्रक्रिया में गड़बड़ी।
गृहमंत्री ननकी राम ने कहा कि किसानों को टोकन प्रक्रिया और ऑनलाइन एंट्री में कठिनाइयों के कारण आत्मघाती प्रयास करने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
सरकार की नीति और असर:
छत्तीसगढ़ सरकार धान खरीद के लिए टोकन आधारित ऑनलाइन प्रणाली लागू करती है ताकि बिक्री पारदर्शी और सुव्यवस्थित हो।
हालांकि, तकनीकी गड़बड़ी और प्रशासनिक देरी ने बैसाखू जैसी घटनाओं को जन्म दिया।
प्रशासन ने आश्वासन दिया कि प्रक्रिया में सुधार के लिए टीम गठित की गई है।
31 जनवरी 2026 – जांजगीर चांपा, कसौटी गांव
किसान: अनिल गढ़वाल, 35 वर्ष, कसौटी गांव निवासी धान का टोकन न मिलने से 120 फीट ऊंचे हाई टेंशन टावर पर चढ़ गया।
करीब 3 घंटे तक पुलिस प्रशासन ने उसे नीचे उतरने के लिए समझाया।
अनिल ने कहा कि अंतिम दिन भी उसने अपना 150 बोरा धान नहीं बेच पाया, उसने कहा कि जब तक धान बिक्री नहीं होगी, वह नीचे नहीं आएगा।
तहसीलदार राजकुमार मरावी ने बताया कि पहला टोकन कट चुका था, टोकन की एक सीमा होती है, टोकन की कमी नहीं है।
कांग्रेस विधायक विकास कश्यप ने सरकार की कठोर नीतियों को जिम्मेदार बताया।
सरकार की नीति और असर:
टोकन प्रणाली का उद्देश्य पारदर्शिता है, लेकिन समीक्षा और सुधार की कमी ने किसान को हताश किया।
प्रशासन ने भरोसा दिया कि सिस्टम में सुधार और तत्काल राहत की योजना है।
30 जनवरी 2026 – अकलतरा, जांजगीर चंपा
किसान: अनुराग सिंह चंदेल, 45 वर्ष, ग्राम सरकार निवासी ने टोकन न मिलने और भारतमाला परियोजना के तहत मुआवजा न मिलने से हताश होकर वीडियो बनाकर कीटनाशक का सेवन किया।
उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया, इलाज जारी।
राजनीतिक प्रतिक्रिया:
कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ने इसे भाजपा सरकार की नीतियों की विफलता बताया।
भाजपा का कहना है कि अधिकांश किसानों की धान खरीदी समय पर हो रही है, और समस्याएँ कुछ मामलों तक सीमित हैं।
सरकार की नीति और असर:
सरकार की धान खरीद नीति में टोकन प्रणाली लागू है, लेकिन मुआवजा वितरण में देरी और जटिलताएं किसानों में हताशा पैदा कर रही हैं।
प्रशासन ने सुधार और प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने का भरोसा दिया।
7 दिसंबर 2025 – महासमुंद, सेनभाटा गांव
किसान: मनबोध गांड़ा, 65 वर्ष ने धान न बिकने की हताशा में खुद का गला काट लिया।
उन्हें बागबहरा अस्पताल ले जाया गया, गंभीर स्थिति में महासमुंद मेडिकल कॉलेज रेफर।
राजनीतिक प्रतिक्रिया:
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे भाजपा सरकार की नीतियों की विफलता बताया।
कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल किसान से मिलने अस्पताल पहुंचा।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया:
महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंहगे ने कहा कि किसान समिति तक नहीं गया था; टोकन कटवाने की कोशिश अन्य माध्यमों से की गई थी।
प्रशासन ने भरोसा दिया कि प्रक्रिया में सुधार किया जा रहा है।
नीति के अनुसार टोकन प्रणाली की सीमा है और किसानों को प्रक्रिया में पारदर्शिता मिलनी चाहिए।
लेकिन सिस्टम में कमी और तकनीकी बाधाएं किसान को हताश करने वाली साबित हुईं।
भाजपा प्रवक्ता अमित चिमनानी का कहना है कि सरकार लगातार 24 लाख किसानों से धान खरीद रही है।
कांग्रेस ने इसे सरकार की नीतियों की विफलता और किसान विरोधी रुख बताया।
प्रशासन सुधार की कोशिश में है, लेकिन सटीक टोकन वितरण और मुआवजा प्रक्रिया की तत्काल आवश्यकता है।
बहरहाल घटनाओं का पैटर्न स्पष्ट करता है कि टोकन और ऑनलाइन प्रक्रिया में बाधाओं के कारण किसान हताश हैं।
राजनीतिक दल इसका लाभ उठाकर सार्वजनिक बहस और विपक्षी दबाव बढ़ा रहे हैं।
प्रशासन सुधार के प्रयास कर रहा है, लेकिन समय पर कार्रवाई न होने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है।
कुल मिलाकर धान बिक्री में टोकन वितरण और मुआवजा प्रक्रिया की खामियां सीधे तौर पर किसानों के जीवन को प्रभावित कर रही हैं।
कोरबा, जांजगीर और महासमुंद में हुई घटनाएं प्रशासनिक सुधार की आवश्यकता और राजनीतिक तनाव की वास्तविक तस्वीर दिखाती हैं।
सरकार की नीतियां अच्छी मंशा से बनाई गई हैं, लेकिन क्रियान्वयन में कमी और तकनीकी बाधाएं किसानों को गंभीर हताशा तक ले जा रही हैं।