रायपुर। छत्तीसगढ़ में साइबर ठगी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया है कि कुछ लोग जरूरतमंद और बेरोजगार युवकों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर अपराधियों को बेच रहे थे। इन खातों का इस्तेमाल देशभर में होने वाली ऑनलाइन ठगी के पैसों को ट्रांसफर और निकालने के लिए किया जा रहा था।
जानकारी के अनुसार, गिरोह के सदस्य लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद खाते का एटीएम कार्ड, पासबुक और सिम कार्ड अपने पास रख लेते थे। बाद में इन्हीं खातों को दूसरे राज्यों के साइबर ठगों को बेच दिया जाता था। कई मामलों में इन खातों को कोलकाता जैसे शहरों में सक्रिय गिरोहों तक पहुंचाया जाता था।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि इन खातों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड से आए पैसों को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था ताकि असली आरोपियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाए। ऐसे खातों को आमतौर पर “म्यूल बैंक अकाउंट” कहा जाता है, जिनके जरिए ठगी की रकम को जल्दी-जल्दी अलग-अलग जगह भेजा जाता है।
सूत्रों के मुताबिक, गिरोह के सदस्य हर बैंक खाते के बदले कुछ हजार रुपये से लेकर मोटी रकम तक कमीशन लेते थे। कई मामलों में जरूरतमंद लोगों को नौकरी या आसान कमाई का झांसा देकर उनके बैंक खाते का इस्तेमाल कराया जाता था।
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोग कौन-कौन हैं और देश के किन-किन राज्यों में इनके तार जुड़े हुए हैं। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोग भी कानूनन अपराध में बराबर के दोषी माने जाते हैं।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी लालच में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को न दें, क्योंकि इससे आप भी साइबर अपराध के मामले में फंस सकते हैं।