रायपुर। भारतमाला परियोजना में छत्तीसगढ़ के रायपुर क्षेत्र में पटवारियों और भू-माफियाओं द्वारा सरकारी जमीन को निजी भूमि दिखाकर लगभग 40 करोड़ रुपये का मुआवजा घोटाला किया गया। यह मामला रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर से जुड़ा है, जहां राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी कर शासन को भारी नुकसान पहुंचाया गया।
यह घोटाला भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण के दौरान सामने आया, जो 2017 में शुरू हुई केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना है।
छत्तीसगढ़ के अभनपुर तहसील के ग्राम नायक बांधा और उरला में चार एकड़ सरकारी जमीन को पटवारियों ने फर्जी दस्तावेज बनाकर 14 हिस्सों में बांट दिया।
मूल खसरा नंबरों में बैकडेटेड नामांतरण और खाता विभाजन कर निजी मालिकाना हक दिखाया गया, जिससे सामान्य मुआवजे के बजाय 70 करोड़ रुपये से अधिक राशि जारी हो गई। इससे शासन को 30-40 करोड़ का सीधा नुकसान हुआ
पटवारियों ने भू-माफियाओं के साथ सांठगांठ कर निम्नलिखित तरीके अपनाए:मूल राजस्व रिकॉर्ड (खसरा, खतौनी) में छेड़छाड़।
मृत भूमि मालिकों की विधवाओं के नाम पर फर्जी दावे पेश कर मुआवजा हासिल करना।
सरकारी भूमि को कृत्रिम रूप से उपखंडों में विभाजित कर मूल्यांकन बढ़ाना।
जिनमें मुख्य रूप से पटवारी बसंत घृतलहरे (तत्कालीन पटवारी, भेलवाडीह):
बसंती धृतलहरे जितेंद्र कुमार साहू, लेख राम देवांगन का नाम सामने आया है
यह षड्यंत्र 2023-2025 के बीच चला, जब भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज थी।
आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और अंति भ्रष्टाचार ब्यूरो (ACB) ने संयुक्त जांच की। 24 जनवरी 2026 को 500 पेज का पहला पूरक चालान रायपुर कोर्ट में दाखिल किया गया।
दिसंबर 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रायपुर-महासमुंद में छापेमारी की, जहां नकदी, दस्तावेज और संपत्तियां जब्त हुईं। जांच में और नाम उजागर हो सकते हैं, जिसमें राजस्व अधिकारी शामिल हैं।
इस घोटाले से न केवल सरकारी खजाना खाली हुआ, बल्कि परियोजना में देरी भी हुई। स्थानीय किसान और ग्रामीण प्रभावित हुए, क्योंकि असली मुआवजे में कटौती संभव है। कोर्ट ने चालान स्वीकार कर सुनवाई शुरू कर दी है, और EOW पूरक जांच जारी रखे हुए है।