बीजापुर। नक्सलवाद के खिलाफ जारी पुलिस, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) और प्रशासन की सक्रिय मुहिम को आज एक बड़ा परिणाम मिला है। जिले में कुल इनामी ₹84 लाख के 34 नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के सामने हथियार डाल दिए और आत्मसमर्पण किया। इस बड़े समूह में 7 महिलाएँ भी शामिल हैं और कई ने माओवादी संगठन के DVCM (डिवीजनल कमेटी मेंबर) और PLGA (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) जैसे उच्च पदों पर काम किया था।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आत्मसमर्पण करने वाले शीर्ष इनामी कैडरों में शामिल हैं:
पांड्रू पुनेम (उर्फ़ संजू) – केरलापाल एरिया कमेटी से DVCM, ₹8 लाख का इनामी,
रुकनी हेमला – ₹8 लाख इनामी
देवा उइका – ₹8 लाख इनामी
रामलाल पोयम – ₹8 लाख इनामी
मोटू पुनेम – ₹8 लाख इनामी,
इन सभी शीर्ष नक्सलियों की भूमिका संगठन के ऑपरेशनों में महत्वपूर्ण मानी जाती थी।
यह सामूहिक सरेंडर ‘पुना मार्गेम’ अभियान के तहत सम्पन्न हुआ – जो नक्सलियों को विकास-आधारित पुनर्वास और मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित करता है। इस कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पुलिस और CRPF अधिकारियों की मौजूदगी रही।
सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत: हर सरेंडर करने वाले को तुरंत ₹50,000 की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
इसके अलावा उन्हें कौशल प्रशिक्षण, रोज़गार संबंधी सुविधाएँ, और अन्य विकास योजनाओं का लाभ भी मिलेगा, ताकि वे शांतिपूर्ण जीवन अपनाकर समाज में पुनः शामिल हो सकें।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण की इस प्रक्रिया में नक्सलियों के परिवारों का सकारात्मक सहयोग भी महत्वपूर्ण था, जिससे कई नक्सलियों ने हथियार छोड़ने का मन बनाया।
बीजापुर सहित बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की नीति और सुरक्षा बलों की कार्रवाइयों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसी रणनीति के कारण हाल ही में नक्सलियों के बड़े समूहों ने सरेंडर किया है, जो क्षेत्र में शांति लौटाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।