भिलाई। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में कड़ाके की ठंड के बीच मरीजों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। दुर्ग और सुपेला स्थित लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल के कैजुअल्टी और वार्डों का जायजा लेने पर सामने आया कि कई मरीज ठंड में ठिठुरते नजर आए, उनके दांत बज रहे थे, लेकिन उन्हें ढंग का कंबल तक उपलब्ध नहीं कराया गया।
गौरतलब है कि जांच के दौरान यह स्थिति केवल सामान्य वार्डों तक सीमित नहीं रही। कैजुअल्टी (ट्रॉमा यूनिट), सर्जिकल वार्ड यहां तक कि सिजेरियन प्रसूति वार्ड किसी भी स्थान पर स्वास्थ्य विभाग का पर्याप्त कंबल नजर नहीं आया। कुछ मरीजों के पास जो सरकारी कंबल थे, वे इतने पतले और घिसे हुए थे कि उनसे ठंडी हवा तक नहीं रुक पा रही थी।
मरीजों और उनके परिजनों ने बताया कि जब उन्होंने अस्पताल स्टाफ से कंबल मांगा तो उन्हें घर से कंबल लाने की सलाह दी गई। मजबूरी में कई तीमारदार रात में घर से रजाई-कंबल मंगाने को विवश हुए।
विशेषज्ञों के अनुसार, ठंड में प्रसूता और नवजात शिशु सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं। नवजातों को हाइपोथर्मिया का खतरा और
प्रसूताओं में संक्रमण और जटिलताओं का जोखिम होता है।
इसके बावजूद प्रसूति वार्ड में गर्माहट और कंबल की उचित व्यवस्था न होना स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मामले पर अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि उनके पास पर्याप्त संख्या में कंबल उपलब्ध हैं, लेकिन कई मरीज कंबल लेना नहीं चाहते। हालांकि, ग्राउंड रिपोर्ट और मरीजों के बयान इस दावे के उलट तस्वीर पेश कर रहे हैं।
एक ओर प्रशासन पर्याप्त सुविधाओं का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर मरीज ठंड में कांपते हुए अस्पताल के फर्श और बेड पर रात गुजारने को मजबूर हैं। यह हालात बताते हैं कि सिस्टम में गंभीर लापरवाही है।
जिसे तत्काल सुधार की जरूरत है
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि: सभी वार्डों में पर्याप्त और मोटे कंबल उपलब्ध कराए जाएं, प्रसूति और नवजात वार्ड में विशेष तापमान नियंत्रण किया जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।