आसमान में भारत की ताकत: 114 राफेल जेट पर मुहर, मोदी-मैक्रों बैठक में डील फाइनल…

नई दिल्ली। भारत ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू जेट विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जो वायुसेना की क्षमता को मजबूत बनाने की दिशा में देश का एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह सौदा ‘मेक इन इंडिया’ प्रावधानों के तहत होगा, जिसमें विमानों का निर्माण भारत में भी किया जाएगा।

प्रस्ताव को मिली मंजूरी:

भारत की रक्षा खरीद बोर्ड (Defence Procurement Board) ने शुक्रवार को फ्रांसीसी विमान निर्माता डसॉल्ट एविएशन से 114 राफेल जेट्स की खरीद को हरी झंडी दे दी है। इस मंजूरी को रक्षा मंत्रालय ने एक महत्त्वपूर्ण औपचारिक प्रगति के रूप में बताया है।

अब यह प्रस्ताव अगली मंजूरी के लिए:

डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) में जाएगा,
इसके बाद कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) द्वारा अंतिम स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।

मेक इन इंडिया के तहत निर्माण:

सूत्रों के अनुसार यह सौदा ‘मेक इन इंडिया’ के तहत होगा, जिसका मतलब है कि राफेल विमानों का एक बड़ा हिस्सा भारत में ही निर्मित होगा। यह स्वदेशी रक्षा उद्योग को सशक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

PM मोदी-प्रेसिडेंट मैक्रों बैठक में डील की पुष्टि:

भारत और फ्रांस फरवरी में प्रस्तावित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की बैठक के दौरान इस रक्षा सौदे को अंतिम रूप देने की संभावना पर काम कर रहे हैं। बैठक में इस डील पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद जताई जा रही है।

डील का अनुमानित आकार:

राफेल की यह खरीद भारत के लिए अब तक की सबसे बड़ी रक्षा डील साबित हो सकती है, जिसका अनुमान लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये के आसपास बताया जा रहा है। इसमें से कुछ विमानों को फ्रांस से सीधे और बाकी को भारत में ही बनाया जाएगा।

रणनीतिक महत्व:

यह सौदा भारतीय वायु सेना को तकनीकी और सामरिक रूप से मजबूत करेगा। राफेल जेट आधुनिक हथियार प्रणाली, रडार और बहुपक्षीय लड़ाकू क्षमताओं से लैस हैं, जो सीमा सुरक्षा और सामरिक संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।

🇮🇳 स्वदेशी उत्पादन और तकनीकी साझेदारी:

‘मेक इन इंडिया’ के तहत राफेल जेट में भारत की भूमिका बढ़ेगी। डसॉल्ट एविएशन और भारत की हवाई उद्योग फर्मों के बीच सहयोग से विमान के कंपोनेंट्स का उत्पादन, असेंबली और तकनीक हस्तांतरण संभव हो सकेगा। इससे रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

क्या आगे क्या होगा?

प्रस्ताव डीएसी और CCS की मंजूरी के लिए जाएगा।
फरवरी में मोदी-मैक्रों बैठक में डील औपचारिक रूप से फाइनल हो सकती है।

मेक इन इंडिया’ के तहत भारत में उत्पादन, औद्योगिक भागीदारी और तकनीक हस्तांतरण पर समझौते की दिशा में काम जारी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *