इंस्पेक्टर बोला- रात को घूमती हो, गैंगरेप पीड़िता ने जान दे दी
लखीमपुर में शिकायत बदलकर आरोपी का नाम हटाया, थाने बुलाकर किया गया अपमान
लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में गैंगरेप की पीड़िता के साथ पुलिस के व्यवहार को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। परिजनों का कहना है कि मानसिक प्रताड़ना और अपमान से परेशान होकर नाबालिग पीड़िता ने अपनी जान दे दी। मामला सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
परिजनों के अनुसार, 26 जनवरी को 17 वर्षीय लड़की खेत में गई थी। रात करीब 9 बजे गांव के महफूज और उसके चाचा मोबीन ने घर से करीब 100 मीटर दूर खेत में उसके साथ गैंगरेप किया। पीड़िता घर पहुंची और पूरी घटना अपनी मां को बताई।
घटना के बाद पीड़िता परिजनों के साथ उसी रात थाने पहुंची। उसने महफूज और मोबीन के खिलाफ गैंगरेप की शिकायत दी। आरोप है कि पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज करने के बजाय जांच का हवाला देकर उन्हें टाल दिया और पीड़िता को परिजनों के साथ घर भेज दिया।
परिजनों का आरोप है कि 27 जनवरी को पुलिस ने शिकायत में बदलाव कर दिया और एक आरोपी का नाम जानबूझकर हटा दिया गया। इससे पीड़िता और अधिक परेशान हो गई।
परिवार का कहना है कि पीड़िता को थाने बुलाया गया, जहां इंस्पेक्टर ने उसे जलील किया। आरोप है कि उससे कहा गया-
“तुम बदतमीज हो, नालायक हो, रात-रात भर गायब रहती हो।”
इस तरह की टिप्पणी से पीड़िता गहरे सदमे में चली गई।
परिजनों का कहना है कि पुलिस की बेरुखी, शिकायत में बदलाव और थाने में हुए अपमान से लड़की पूरी तरह टूट चुकी थी। थाने से घर लौटने के कुछ समय बाद उसने अपने कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी। उसका शव घर के कमरे में फंदे से लटका मिला।
मामले की जानकारी पुलिस अधीक्षक को मिलने के बाद 27 जनवरी को एफआईआर दर्ज की गई। इसके बावजूद परिजनों का आरोप है कि अब भी एक आरोपी का नाम जानबूझकर मुकदमे से बाहर रखा गया है।
पीड़िता अपने नाना के घर रहकर पढ़ाई कर रही थी। वह इंटरमीडिएट की छात्रा थी और जीजीआईसी कॉलेज में पढ़ती थी। पीड़िता की मां भी अपने मायके में ही रहती थीं, जबकि पिता बेंगलुरु में काम करते थे।
मामले को लेकर हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश है। संगठनों ने दोषी आरोपियों और लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
धौरहरा से विधायक विनोद शंकर अवस्थी ने पीड़िता के परिवार से मुलाकात की। उन्होंने परिजनों को न्याय का भरोसा दिलाते हुए कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
परिजनों का कहना है कि अगर समय रहते पुलिस ने निष्पक्ष कार्रवाई की होती और पीड़िता को अपमानित न किया गया होता, तो आज उनकी बेटी जिंदा होती। उन्होंने पूरे मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।