72 साल पुरानी दिल्ली की परंपरा बदलने पर राज ठाकरे ने उठाए सवाल, संजय राउत ने भी किया विरोध; इस बार एकता नगर में होगा 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह
मुंबई/गुजरात, 12 सितंबर 2026। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह को दिल्ली से गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में आयोजित किए जाने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने समारोह की जगह बदलने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। वहीं अभिनेता परेश रावल ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि गुजरात भी भारत का ही हिस्सा है और देश के अलग-अलग राज्यों में ऐसे राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम आयोजित होने चाहिए।
परेश रावल ने समारोह को गुजरात ले जाने पर उठ रहे सवालों पर कहा कि गुजरात कोई अलग देश नहीं है। उनका कहना है कि जब देश के किसी भी राज्य में राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम आयोजित किया जा सकता है, तो गुजरात में ऐसा आयोजन होने में भी कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा, “क्या गुजरात बांग्लादेश या पाकिस्तान में है? वह भी हमारे अपने देश का हिस्सा है।” परेश रावल ने यह भी कहा कि ऐसे बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रम केवल एक स्थान तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि देश के हर राज्य को इस तरह के आयोजनों की मेजबानी का अवसर मिलना चाहिए।
राज ठाकरे ने पूछा- गुजरात को ही क्यों चुना गया?
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह को गुजरात ले जाने के फैसले पर राज ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि 72 वर्षों से दिल्ली में आयोजित हो रहे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह की परंपरा को अचानक बदलने की जरूरत क्यों पड़ी।
राज ठाकरे ने मुंबई और दिल्ली के महत्व से जुड़े सवाल उठाते हुए कहा कि अगर राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों का स्थान बदला जाना था तो मुंबई जैसे बड़े फिल्म केंद्र को मौका क्यों नहीं दिया गया।
उन्होंने दादासाहेब फाल्के का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय सिनेमा की नींव महाराष्ट्र में रखी गई थी। इसके अलावा तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में भी बड़े पैमाने पर फिल्म निर्माण होता है। ऐसे में उन्होंने सवाल किया कि गुजरात को ही इस आयोजन के लिए क्यों चुना गया।
‘गुजरात को हर चीज का केंद्र बनाने की कोशिश’
राज ठाकरे ने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया कि गुजरात को लगातार बड़े राष्ट्रीय आयोजनों का केंद्र बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कॉमनवेल्थ और 2023 क्रिकेट विश्व कप से जुड़े आयोजनों की लोकेशन का भी उल्लेख किया।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश के दूसरे हिस्सों की अहमियत कम की जा रही है। राज ठाकरे ने कलाकारों से भी इस मुद्दे पर आवाज उठाने की अपील की और कहा कि उन्हें सवाल करना चाहिए कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की लंबे समय से चली आ रही परंपरा को क्यों बदला जा रहा है।
उन्होंने अमेरिका में ऑस्कर पुरस्कार समारोह का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां राजनीतिक नेतृत्व बदलने के बावजूद पुरस्कार समारोह की परंपरागत जगह को बदलने की कोशिश नहीं की गई।
संजय राउत भी फैसले के विरोध में
शिवसेना नेता संजय राउत ने भी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह गुजरात में आयोजित किए जाने पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि यह गुजरात से संबंधित कोई कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह है। इसलिए इसे दिल्ली में ही आयोजित किया जाना चाहिए था, जहां पिछले कई वर्षों से इसका आयोजन होता रहा है।
संजय राउत ने कलाकारों से समारोह में शामिल नहीं होने और कार्यक्रम के बहिष्कार की अपील भी की है।
पहली बार दिल्ली से बाहर होगा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह अब तक मुख्य रूप से नई दिल्ली में आयोजित होता रहा है। 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का समारोह 23 सितंबर 2025 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में हुआ था।
अब 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के लिए इस परंपरा में बदलाव किया जा रहा है। इस बार समारोह गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में आयोजित किए जाने की तैयारी है। इसे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का दिल्ली से बाहर होने वाला पहला आयोजन बताया जा रहा है।
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के विजेताओं की घोषणा हो चुकी
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के विजेताओं की घोषणा 18 जुलाई 2026 को की जा चुकी है।
इसमें ‘आर्टिकल 370’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला है। अभिनेत्री यामी गौतम को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सम्मान दिया गया है। वहीं सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार कार्तिक आर्यन को ‘चंदू चैंपियन’ और ममूटी को ‘ब्रह्मयुगम’ के लिए संयुक्त रूप से दिया गया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों पुरस्कार मिलने की संभावना
रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का 22 सितंबर को गुजरात दौरा प्रस्तावित है। इस दौरान वह महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा के दीक्षांत समारोह में शामिल हो सकती हैं। इसके बाद पदरा में ब्रह्माकुमारीज के कार्यक्रम में हिस्सा लेने का कार्यक्रम बताया गया है।
इसी दौरे के दौरान राष्ट्रपति के एकता नगर जाने की भी संभावना जताई जा रही है, जहां वह 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान कर सकती हैं।
एकता नगर को ही क्यों चुना गया?
गुजरात के नर्मदा जिले में स्थित एकता नगर (केवड़िया) देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां स्टैच्यू ऑफ यूनिटी प्रमुख आकर्षण है। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जैसे बड़े आयोजन को यहां कराने के पीछे इसे राष्ट्रीय एकता और पर्यटन से जोड़कर देखने का संदेश भी माना जा रहा है।
खास बात यह है कि 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में आनंद एल राय की डॉक्यूमेंट्री ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी-एकता का प्रतीक’ को भी सम्मान मिला है। यह डॉक्यूमेंट्री स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और केवड़िया के विकास की कहानी पर आधारित है।
ऐसे में एकता नगर में समारोह आयोजित किए जाने को लेकर जहां सरकार की ओर से राष्ट्रीय एकता और देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़े आयोजनों को बढ़ावा देने का संदेश देखा जा रहा है, वहीं महाराष्ट्र के राजनीतिक नेताओं की ओर से इसे लेकर परंपरा और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व से जुड़े सवाल उठाए जा रहे हैं।