जय माता दी लिखा था लेकिन QR कोड ने खोल दी पहचान! महाशिवरात्रि मेले में ‘भाईजान चाट’ पर बजरंग दल का बवाल…

चरोदा। चरोदा महाशिवरात्रि मेले के दौरान एक बड़ा विवाद सामने आया है, जहां बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर मुस्लिम दुकानदारों को धर्म के आधार पर दुकान समेटने को मजबूर किया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

बताया जा रहा है कि विवाद की शुरुआत एक गुपचुप (चाट) ठेले से हुई। ठेले पर “अजीत चाट भंडार” और “जय माता दी” लिखा था। लेकिन जब ग्राहकों ने ऑनलाइन पेमेंट के लिए QR कोड स्कैन किया तो नाम “भाईजान चाट वाला” दिखाई दिया। इसके बाद बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई।

कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि यह “हिंदू समाज को धोखा देकर व्यापार” करने का मामला है। उन्होंने “थूक और मूत्र जिहाद” जैसे आरोप लगाते हुए दुकान बंद करा दी।

छत्तीसगढ़ बजरंग दल की ज्योति शर्मा ने कहा:

हिंदू समाज को धोखा देकर व्यापार करने की क्या जरूरत है? जो भी दुकान लगाए, अपनी पहचान के साथ लगाए। ये लोग थूककर ही सामान बेचते हैं।

कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा:

तुम्हारी गलती है कि तुम मुस्लिम हो।

साथ ही मुस्लिम दुकानदारों से कहा गया कि अगर वे “अच्छे मुसलमान” हैं तो “गरियाबंद मामले” में विरोध क्यों नहीं किया।

मेले में भगवान की तस्वीरें बेच रही एक मुस्लिम महिला को भी बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने घेर लिया। उससे कहा गया:

तुम्हारे समाज वाले हिंदुओं को गोली मार रहे हैं।

और यह भी कहा गया:
तुम्हारी गलती है कि तुम मुस्लिम हो।

बताया जा रहा है कि महिला से “जय श्री राम” के नारे लगाने को भी कहा गया।

इस पर मुस्लिम महिला दुकानदार ने जवाब दिया:

हम यहां पर रहते हैं, हमारी क्या गलती है?

उसने कहा कि वह वर्षों से मेला में दुकान लगा रही है और किसी तरह का विवाद नहीं हुआ था।

मुस्लिम दुकानदारों से कहा गया कि दुकान बहुत हो गई, अब बंद करो और मस्जिद के सामने जाकर दुकान लगाना।

कुछ महिलाओं ने मुस्लिम व्यापारी से सामान खरीद लिया था, लेकिन कार्यकर्ताओं ने सामान वापस करवाया।

महिलाओं से कहा गया कि मुस्लिमों से सामान न खरीदें।

एक मुस्लिम व्यापारी ने कहा:

हम 25 साल से यहां दुकान लगा रहे हैं।

महाशिवरात्रि मेले के दौरान यह घटनाक्रम काफी देर तक चलता रहा। वीडियो में दिख रहा है कि कार्यकर्ता लगातार मुस्लिम दुकानदारों से सवाल-जवाब करते रहे।

अब यह मामला सोशल मीडिया पर बहस का विषय बना हुआ है। प्रशासन की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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