नाथू ला और लिपुलेख मार्ग से जून-अगस्त तक यात्रा, सीमित बैच में चयन; कड़ी जांच और फिटनेस नियम होंगे लागू
उत्तराखंड। काफी समय बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा एक बार फिर शुरू होने जा रही है, जिससे श्रद्धालुओं में उत्साह बढ़ गया है। यह पवित्र यात्रा इस साल जून से अगस्त के बीच आयोजित होगी और इसके लिए दो प्रमुख मार्ग-नाथू ला (सिक्किम) और लिपुलेख पास (उत्तराखंड)-का इस्तेमाल किया जाएगा।
विदेश मंत्रालय के समन्वय में आयोजित इस यात्रा में कुल 20 बैच बनाए जाएंगे, जिनमें प्रत्येक बैच में करीब 50 श्रद्धालु शामिल होंगे। यानी सीमित संख्या में ही लोगों को इस यात्रा का अवसर मिलेगा और चयन प्रक्रिया कंप्यूटरीकृत ड्रॉ के जरिए की जाएगी।
यात्रा के लिए आवेदन करने वालों को सख्त मेडिकल जांच और फिटनेस मानकों से गुजरना होगा, क्योंकि यह यात्रा ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों से होकर गुजरती है। नाथू ला मार्ग अपेक्षाकृत आसान माना जाता है, जबकि लिपुलेख मार्ग में ट्रैकिंग और ज्यादा शारीरिक क्षमता की जरूरत होती है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म के अनुयायियों के लिए बेहद पवित्र मानी जाती है। यह यात्रा न सिर्फ धार्मिक आस्था से जुड़ी है, बल्कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इसे सबसे चुनौतीपूर्ण यात्राओं में भी गिना जाता है।
सरकार द्वारा इस यात्रा को फिर से शुरू करने का फैसला भारत-चीन के बीच बेहतर होते संबंधों और सहयोग का संकेत भी माना जा रहा है। अब अंतिम तैयारियों के साथ श्रद्धालुओं के पंजीकरण और चयन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।