रायपुर/गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक दिल को झकझोर देने वाली कहानी सामने आई है, जहां एक परिवार वर्षों से श्मशान घाट में रहकर जिंदगी गुजारने को मजबूर है। यह कहानी न सिर्फ गरीबी की हकीकत दिखाती है, बल्कि व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े करती है।
🔹 श्मशान बना आशियाना
गobra-नवापारा क्षेत्र में रहने वाला ईश्वर निषाद का परिवार लंबे समय से श्मशान घाट को ही अपना घर बनाए हुए है। जहां आम लोग कुछ समय के लिए भी ठहरना नहीं चाहते, वहीं यह परिवार रोजमर्रा की जिंदगी यहीं बिताता है।
🔹 मजबूरी बनी जिंदगी
आर्थिक तंगी और रहने के लिए कोई स्थायी जगह न होने के कारण परिवार को यह कदम उठाना पड़ा। पक्के मकान या सरकारी सहायता के अभाव में उन्होंने श्मशान के पास ही झोपड़ी बनाकर रहना शुरू कर दिया।
🔹 डर के साए में बचपन
परिवार के बच्चों का बचपन भी इसी माहौल में बीत रहा है। जहां अन्य बच्चे स्कूल और खेल के मैदान में समय बिताते हैं, वहीं ये बच्चे चिताओं और सन्नाटे के बीच बड़े हो रहे हैं।
🔹 सुविधाओं का अभाव
परिवार को बिजली, पानी और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। बावजूद इसके, वे हालात से समझौता कर जीवन जीने को मजबूर हैं।
🔹 प्रशासन से उम्मीद
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें। यह मामला प्रशासन के संज्ञान में आने के बाद मदद की उम्मीद भी जताई जा रही है।
📌 निष्कर्ष:
गरियाबंद का यह परिवार हमें याद दिलाता है कि आज भी कई लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। विकास के दावों के बीच ऐसी कहानियां समाज और सिस्टम दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती हैं।