6 अक्टूबर को होगा उपचुनाव, नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को टिकट; ममता के फैसले ने बढ़ाई सियासी हलचल
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर नंदीग्राम सीट चर्चा के केंद्र में आ गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आगामी विधानसभा उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह है कि पार्टी ने नंदीग्राम से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को मैदान में नहीं उतारा है।
TMC ने नंदीग्राम विधानसभा सीट से संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया है, जबकि रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को टिकट दिया गया है। पार्टी ने रविवार को इन नामों की घोषणा की।
नंदीग्राम पर क्यों थी सबकी नजर?
नंदीग्राम ममता बनर्जी के लिए बेहद महत्वपूर्ण राजनीतिक सीट रही है। 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने इसी सीट से चुनाव लड़ा था, जहां उन्हें भाजपा के शुभेंदु अधिकारी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। अब उपचुनाव में TMC ने ममता के बजाय संचिता प्रधान डे पर भरोसा जताया है।
ममता बनर्जी का नंदीग्राम से उपचुनाव नहीं लड़ना इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ समय से इस सीट को लेकर उनके नाम की चर्चाएं चल रही थीं। पार्टी के उम्मीदवार की घोषणा के साथ इन अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है।
6 अक्टूबर को वोटिंग, 9 अक्टूबर को नतीजे
नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होना है। मतगणना और परिणाम 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। उम्मीदवारों के नामांकन की अंतिम तारीख 16 सितंबर बताई गई है।
TMC के सामने पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह का विवाद भी
उपचुनाव की घोषणा ऐसे समय हुई है जब TMC के भीतर संगठन और चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद चल रहा है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले विरोधी गुट ने पार्टी के नाम और पारंपरिक ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिन्ह पर अपना दावा किया है।
चुनाव आयोग दोनों पक्षों की दलीलें सुन रहा है। आयोग ने मामले में अतिरिक्त दस्तावेज भी मांगे हैं और दोनों पक्षों से अंतिम जवाब मांगा गया है।
अब नंदीग्राम में सीधा मुकाबला होगा अहम
TMC के उम्मीदवार के ऐलान के बाद नंदीग्राम का उपचुनाव और दिलचस्प हो गया है। इस सीट का राजनीतिक इतिहास और ममता बनर्जी तथा शुभेंदु अधिकारी के बीच पुरानी सियासी टक्कर इसे राज्य की सबसे चर्चित सीटों में रखती है।
अब देखना होगा कि TMC की संचिता प्रधान डे पार्टी के लिए नंदीग्राम में कितना मजबूत मुकाबला खड़ा कर पाती हैं और ममता बनर्जी के मैदान में नहीं उतरने का चुनावी असर क्या रहता है।