उत्तराखंड। पाताल भुवनेश्वर गुफा उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के भुवनेश्वर गांव में गंगोलीहाट के पास स्थित है। यह गुफा समुद्र तल से लगभग 1350 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।
पौराणिक इतिहास और मान्यताएँ–
पुराणों के अनुसार इस गुफा की प्रारंभिक खोज त्रेता-युग में हुई थी। कहा जाता है कि अयोध्या के सूर्यवंशी राजा ऋतुपर्णा ने पहली बार इसका अन्वेषण किया था।
क्या है पाताल भुवनेश्वर?
यह प्राकृतिक चूना-पत्थर से बनी गुफा है जो लगभग 160 मीटर लंबी और 90 फीट गहरी है। अंदर एक से अधिक गुफाओं का जाल है – इसलिए इसे गुफा-सिटी भी कहा जाता है। गुफा की दीवारों व छत पर प्राकृतिक रूप से बने स्टैलैक्टाइट और स्टैलाग्माइट अनेक देवताओं और पौराणिक आकृतियों जैसे शेषनाग, शिवलिंग, गणेश इत्यादि के रूप में दिखाई देते हैं।
स्कंद पुराण के “मानस खंड” में भी पाताल भुवनेश्वर का वर्णन मिलता है।
कुछ मान्यताओं के अनुसार पांडवों ने भी यहीं ध्यान किया था और अपनी अंतिम यात्रा से पहले यहाँ आए थे। गुफा को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है तथा 33 करोड़ देवी-देवताओं का अस्तित्व भी यहीं बताया गया है।
गुफा का प्रवेश द्वार संकीर्ण है और नीचे उतरने के लिए तंग पत्थरीले रास्तों और लोहे की जंजीरों का सहारा लेना पड़़ता है। अंदर कई गलियाँ हैं और हर जगह धार्मिक तथा पौराणिक आकृतियाँ खुद बनी हुई प्रतीत होती हैं।
मौज़ूदा मौसम एवं गुफा के वातावरण में ऑक्सीजन की कमी के कारण अगस्त से अक्टूबर तक गुफा में दर्शन में दिक्कत होती है – इसके कारण कुछ समय गुफा के दर्शन बंद भी रहते हैं। प्रशासन और मंदिर समिति ने ऑक्सीजन की समस्या को देखते हुए योजना बनाई है कि गुफा में ऑक्सीजन प्लांट लगाया जाए, जिससे सालभर पर्यटक आ सकें और उन्हें सांस लेने में कोई समस्या न हो। इसके अलावा ऑक्सीजन सिलेंडर, ऑक्सीजन किट और ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर मशीन जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई जा रही हैं ताकि जोखिम कम हो।
पर्यटन और विकास–
मानस खण्ड माला मिशन के तहत पाताल भुवनेश्वर गुफा को आध्यात्मिक तथा प्राकृतिक पर्यटन के रूप में अत्यधिक महत्व दिया जा रहा है।
इसके लिए 239 लाख रुपये से अधिक के विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं जिसमें गुफा के आस-पास सुविधाओं का विस्तार भी शामिल है।
सीसीटीवी कैमरे, बेहतर मार्ग, पार्किंग एवं सुरक्षा व्यवस्थाएँ स्थापित की जा रही हैं ताकि पर्यटकों का अनुभव और भी सुरक्षित बने।
कैसे पहुँचे?
सड़क – गुफा गंगोलीहाट से करीब 14 किमी दूर है।
हवाई – नजदीकी विमानतल: नैनी सैनी/पंतनगर (लगभग 90–270 किमी दूरी पर)।
रेल – नजदीकी स्टेशन: काठगोदाम/तनकपुर (~164–270 किमी)।
पाताल भुवनेश्वर गुफा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि प्राकृतिक चमत्कार, पौराणिक इतिहास और रहस्य-कहानी का मिश्रण है। अब ऑक्सीजन प्लांट की योजना के चलते यह गुफा सालभर पर्यटकों के लिए खुली रहने की दिशा में अग्रसर है – जिससे हिमालय की इस अद्भुत प्राकृतिक धरोहर को और भी लोग अनुभव कर सकेंगे।