अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां किसानों ने रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती को अपनाया और “नीमास्त्र” जैसे देसी जैविक कीटनाशक से शानदार सफलता हासिल की है। कम लागत और बेहतर उत्पादन के कारण अब ये किसान अन्य किसानों के लिए मिसाल बन रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, नीम के पत्तों, गोबर और गौमूत्र से तैयार किया जाने वाला “नीमास्त्र” एक प्रभावी प्राकृतिक कीटनाशक है, जो फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों से बचाता है और मिट्टी की सेहत भी सुधारता है।
🌱 कम लागत में ज्यादा मुनाफा
अंबिकापुर के किसानों ने बताया कि पहले रासायनिक दवाइयों पर काफी खर्च होता था, लेकिन अब नीमास्त्र के उपयोग से लागत काफी कम हो गई है। स्थानीय संसाधनों से तैयार होने के कारण यह लगभग मुफ्त या बेहद सस्ता पड़ता है।
🌿 फसलों को मिल रही बेहतर सुरक्षा
नीमास्त्र का नियमित छिड़काव करने से कीटों का प्रकोप कम हुआ है। यह खासतौर पर चूसक कीटों और फफूंद से फसलों की रक्षा करता है, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है।
🌍 पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद
यह प्राकृतिक कीटनाशक न केवल किसानों के लिए फायदेमंद है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है। इसमें किसी प्रकार के हानिकारक रसायन नहीं होते, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और जैविक खेती को बढ़ावा मिलता है।
👨🌾 दूसरे किसानों को भी मिल रही प्रेरणा
अंबिकापुर के इन किसानों की सफलता को देखकर आसपास के क्षेत्रों के किसान भी अब प्राकृतिक खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कृषि विशेषज्ञ भी इसे टिकाऊ खेती (sustainable farming) की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं।
👉 विशेष: नीमास्त्र जैसी देसी तकनीकों को अपनाकर किसान कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं और साथ ही सुरक्षित व रसायनमुक्त खेती को बढ़ावा दे सकते हैं।