कबीरधाम। छत्तीसगढ़ में अब मुर्गा लड़ाई से जुड़ा कारोबार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैलता नजर आ रहा है। खासकर कबीरधाम और आसपास के इलाकों में सोशल मीडिया के जरिए लड़ाकू मुर्गों की खरीद-फरोख्त का नया ट्रेंड सामने आया है, जहां कीमतें कैटलॉग और वीडियो देखकर तय की जा रही हैं।
जानकारी के मुताबिक, मुर्गों के मालिक उनके लड़ाई के कौशल, ताकत और पिछले रिकॉर्ड के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा कर रहे हैं। इन्हीं वीडियो और तस्वीरों के आधार पर खरीदार मुर्गों की क्षमता का आकलन कर उनकी कीमत तय करते हैं।
🔴 ऑनलाइन ऑर्डर से बढ़ा कारोबार
अब यह कारोबार पारंपरिक बाजार से निकलकर ऑनलाइन ऑर्डर तक पहुंच गया है। ग्राहक सोशल मीडिया के जरिए संपर्क कर सीधे ऑर्डर दे रहे हैं, जिससे यह गतिविधि तेजी से फैल रही है।
🔴 वीडियो और कैटलॉग बने ‘रेट कार्ड’
मुर्गों की कीमत उनके “फाइटिंग स्टाइल”, वजन और जीत के रिकॉर्ड पर निर्भर करती है। विक्रेता अलग-अलग मुर्गों का डिजिटल कैटलॉग तैयार कर रहे हैं, जिससे खरीदारों को विकल्प चुनने में आसानी हो रही है।
🔴 कानून और परंपरा के बीच सवाल
हालांकि, पशु क्रूरता और अवैध जुए से जुड़े नियमों के चलते इस तरह की गतिविधियों पर सवाल भी उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का ऑनलाइन विस्तार कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है।
🔴 ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से फैल रहा ट्रेंड
ग्रामीण इलाकों में पहले से मौजूद मुर्गा लड़ाई की परंपरा अब डिजिटल माध्यम से और ज्यादा संगठित रूप ले रही है। सोशल मीडिया ने इसे नया बाजार और व्यापक पहुंच दे दी है।
👉 निष्कर्ष:
सोशल मीडिया के दौर में पारंपरिक गतिविधियां भी अब डिजिटल रूप ले रही हैं, लेकिन इसके साथ कानूनी और नैतिक पहलुओं पर ध्यान देना बेहद जरूरी हो गया है।