5 करोड़ की जंबूरी पर सियासी तूफान: कांग्रेस ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप, शिक्षा मंत्री गजेन्द्र सिंह बोले- सब झूठ, काम JEM से…

बालोद। 9 से 13 जनवरी 2026 तक छत्तीसगढ़ के बालोद में होने वाले राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी को लेकर राजनीति गर्मा गई है। इस आयोजन को लेकर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप और उनका सरकार की ओर से खंडन सामने आया है, जिससे सियासी विवाद गहरा गया है।

क्या है रोवर-रेंजर जंबूरी?

राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी भारत स्काउट्स एवं गाइड्स का एक राष्ट्रीय-स्तरीय कैम्प/सम्मेलन है, जिसमें देश भर से 12,000 से 15,000 युवा रोवर और रेंजर शामिल होने की उम्मीद है। इसे छत्तीसगढ़ के दुधली, जिला बालोद में आयोजित किया जाना है।

कांग्रेस का आरोप: 5-10 करोड़ की अनियमितता। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस समेत कुछ सोशल मीडिया आवाजों ने आरोप लगाया कि:

आयोजन में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताएँ हुई हैं।

5 करोड़ से 10 करोड़ रुपए की राशि के उपयोग में गड़बड़ी है।

राशि को भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के खाते की बजाय जिला शिक्षा अधिकारी, बालोद के खाते में ट्रांसफर किया गया।

कार्य स्थल बदलने (नया रायपुर से बालोद) को लेकर संविधान और नियमों की अनदेखी हुई। इन आरोपों के आधार पर कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, जिला अधिकारियों और अन्य पर एफ़आईआर दर्ज करने की भी मांग उठाई थी।

शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का जवाब:-

छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मीडिया से कहा कि:
कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है। आयोजन के खर्च और टेंडर JEM पोर्टल (Government e-Marketplace) से पारदर्शी रूप से किए जा रहे हैं। 5 करोड़ रुपये का काम JEM पोर्टल पर कलेक्टर की अध्यक्षता में निविदा के माध्यम से हो रहा है। कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे आरोप मिथ्या/झूठे हैं और सरकार को बदनाम करने का प्रयास है।

भारत स्काउट्स एवं गाइड्स, छत्तीसगढ़ राज्य परिषद के अध्यक्ष के तौर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने जंबूरी को स्थगित करने की घोषणा की थी, यह कहते हुए कि आयोजन में वित्तीय अनियमितता पाई गई है।

वहीं स्टेट आयुक्त इंदरजीत सिंह खालसा ने सोशल मीडिया पर प्रचार को भ्रामक बताया और सवाल उठाया कि उन्हें आयोजन स्थल परिवर्तन की जानकारी नहीं दी गई थी।

मुख्य विवाद इस बात को लेकर है कि:-

1. आयोजन स्थल बिना अनुमति बदला गया या नहीं।

2. 10 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता की बातें कितनी मान्य हैं।

3. क्या JEM पोर्टल के माध्यम से खर्च पूरी तरह पारदर्शी ढंग से हुआ है।

इन सब आरोपों-खण्डनों के बीच आयोजन की स्थगन/निरस्त की अफवाहें भी चल रहीं हैं, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि जंबूरी कार्यक्रम अपने निर्धारित तिथि एवं कार्यक्रम के अनुसार ही आयोजित किया जा रहा है।

आयोजक कहते हैं कि सभी तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं और जंबूरी तय तारीखों (9-13 जनवरी) पर ही होगी।

कांग्रेस-बीजेपी के आरोप-प्रत्यारोपों के बीच इसमें राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ा है।

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