कवर्धा। साल 2024-25 की समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी गई धान की जांच में बड़ा घपला सामने आया है। कवर्धा जिले के बाजार चारभाठा और बघर्रा संग्रहण केंद्रों से 26,000 क्विंटल धान गायब पाया गया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹7 करोड़ बताई जा रही है।
जिला विपणन अधिकारी अभिषेक मिश्रा का कहना है कि यह धान चोरी नहीं हुई है बल्कि मौसम, चूहे, दीमक और कीट-पतंगों ने इसे नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने यह भी कहा कि कवर्धा में स्थिति प्रदेश के अन्य संग्रहण केंद्रों की तुलना में बेहतर है।
जांच में गंभीर अनियमितताएँ लेकिन प्रारंभिक जांच में:
1. फर्जी आवक-जावक रिकॉर्ड
2. डैमेज धान के नकली बिल
3. मजदूरों की फर्जी हाजिरी
4. CCTV में छेड़छाड़
जैसी गड़बड़ियों के संकेत मिले हैं। बाज़ार चारभाठा केंद्र के प्रभारी प्रीतेश पांडेय को हटा भी दिया गया है और विस्तृत जांच जारी है।
कांग्रेस ने प्रशासन और विपणन विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने डीएमओ कार्यालय पर चूहा पकड़ने की जाली सौंपते हुए प्रदर्शन किया और उच्चस्तरीय जांच तथा दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की। स्थानीय कांग्रेस नेता नवीन जायसवाल और किसान नेता रवि चंद्रवंशी भी इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में धान कैसे ‘कीड़ों और चूहों’ ने खा दी? क्या असली कारण प्रशासन की लापरवाही है या बड़ा धान घोटाला? अधिकारियों के बयान और फर्जी रिकॉर्ड की वजह से जांच में गंभीर आरोपों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।