ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश में 1978 में बना अरुणाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम (APFRA) आखिरकार 48 साल बाद लागू कर दिया गया है। इस कानून का उद्देश्य बल, प्रलोभन या धोखाधड़ी के जरिए होने वाले धर्मांतरण को रोकना बताया गया है। यह कानून वर्षों तक सिर्फ कागजों में रहा क्योंकि इसके लिए आवश्यक नियम नहीं बनाए गए थे।
जानकारी के अनुसार, पिछले पांच दशकों में राज्य में ईसाई आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 1971 में जहां ईसाई आबादी 1% से भी कम थी, वहीं 2011 की जनगणना में यह बढ़कर 30% से अधिक हो गई। इसी पृष्ठभूमि में कानून को लागू करने की मांग तेज हुई थी।
कानून के समर्थकों का कहना है कि इससे आदिवासी और पारंपरिक आस्थाओं की रक्षा होगी तथा जबरन धर्मांतरण पर रोक लगेगी। वहीं ईसाई संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने आशंका जताई है कि कानून का दुरुपयोग हो सकता है और धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
मुख्य बातें
▪️ 1978 में बना कानून 48 साल बाद लागू
▪️ बल, प्रलोभन और धोखे से धर्मांतरण पर रोक का प्रावधान
▪️ ईसाई आबादी 1971 के 0.79% से बढ़कर 2011 में 30.26% हुई
▪️ कानून को लेकर समर्थन और विरोध दोनों तेज