7 साल बाद सेक्स सीडी कांड में बड़ा कानूनी उलटफेर: भूपेश बघेल की बढ़ीं मुश्किलें
सेशन कोर्ट ने CBI की रिव्यू पिटिशन मंजूर की, बरी करने का आदेश पलटा; दोबारा सुनवाई का रास्ता साफ
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति को लंबे समय तक झकझोरने वाले बहुचर्चित सेक्स सीडी कांड में सात साल बाद एक बार फिर बड़ा मोड़ आ गया है। इस मामले में पहले बरी हो चुके प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के लिए यह फैसला नई कानूनी चुनौती बनकर सामने आया है।
सेशन कोर्ट ने CBI की रिव्यू पिटिशन स्वीकार करते हुए CBI की विशेष अदालत के फैसले को पलट दिया है और मामले की दुबारा सुनवाई को मंजूरी दे दी है।
सेशन कोर्ट ने इसके साथ ही भूपेश बघेल को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश भी जारी किया है, जिससे साफ हो गया है कि यह मामला अब दोबारा ट्रायल की ओर बढ़ेगा।
इस हाई-प्रोफाइल मामले की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी। इसके बाद CBI की विशेष अदालत में करीब सात वर्षों तक सुनवाई चली।
लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद 25 मार्च 2025 को CBI की विशेष अदालत ने भूपेश बघेल को यह कहते हुए आरोपों से बरी कर दिया था कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए प्रथम दृष्टया कोई ठोस आधार नहीं बनता।
इस फैसले को भूपेश बघेल के लिए बड़ी कानूनी राहत के रूप में देखा गया था और राजनीतिक रूप से भी इसे एक अहम मोड़ माना गया था।
CBI ने विशेष अदालत के फैसले से असहमति जताते हुए सेशन कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दाखिल की थी।
CBI का तर्क था कि-
निचली अदालत ने मामले के अहम पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और सबूतों की उचित व्याख्या नहीं हुई।
इसलिए मामले में दोबारा सुनवाई जरूरी है
सेशन कोर्ट ने CBI की इन दलीलों को स्वीकार करते हुए रिव्यू पिटिशन मंजूर कर ली।
सेशन कोर्ट का अहम और दूरगामी आदेश;
सेशन कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामले में पुनर्विचार की आवश्यकता है,
प्रथम दृष्टया ऐसे तथ्य मौजूद हैं, जिन पर ट्रायल चलाया जाना चाहिए, इसलिए सभी आरोपियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी
इस फैसले के बाद अब मामला फिर से CBI की विशेष अदालत में सुनवाई के लिए जाएगा।
गौरतलब है कि मार्च 2025 में भूपेश बघेल के बरी होने के बाद व्यापारी कैलाश मुरारका और पत्रकार विनोद वर्मा ने भी विशेष अदालत में खुद को दोषमुक्त करने का आवेदन दिया था। उन्होंने दलील दी थी कि जब मुख्य आरोपी को राहत मिल चुकी है, तो उन्हें भी बरी किया जाए।
हालांकि अदालत ने दोनों की अर्जियां खारिज कर दी थीं, जिससे यह संकेत पहले ही मिल गया था कि मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
इस पूरे प्रकरण में कुल छह आरोपियों के नाम सामने आए थे जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, व्यापारी कैलाश मुरारका, पत्रकार और तत्कालीन मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार विनोद वर्मा, विजय भाटिया, विजय पांड्या, रिंकू खनूजा पूछताछ के बाद उनकी मृत्यु हो गई थी।
कैसे सामने आया था पूरा मामला?
17 अक्टूबर 2017: भाजपा नेता प्रकाश बजाज ने रायपुर के पंडरी थाने में शिकायत दर्ज कराई।
उसी रात दिल्ली में मौजूद पुलिस टीम ने कॉपी सेंटर और साइबर कैफे पर छापा मारकर कथित आपत्तिजनक सीडी जब्त की।
28 अक्टूबर 2017: पत्रकार विनोद वर्मा को दिल्ली से गिरफ्तार कर रायपुर लाया गया, बाद में मामले की जांच CBI को सौंप दी गई
28 दिसंबर 2017: विनोद वर्मा को कोर्ट से जमानत मिली
6 जून 2018: CBI ने आरोपी रिंकू खनूजा से पूछताछ की, जिसके बाद मामला गंभीर मोड़ पर पहुंच गया।
सेशन कोर्ट के इस फैसले के बाद-
छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है, वहीं कांग्रेस के लिए यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर संवेदनशील माना जा रहा है।
आने वाले समय में अदालत की कार्यवाही के साथ-साथ राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज होने की संभावना है।
कुल मिलाकर सात साल पुराने सेक्स सीडी कांड में आया यह फैसला साफ संकेत देता है कि मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। सेशन कोर्ट द्वारा रिव्यू पिटिशन स्वीकार किया जाना इस केस को एक नए न्यायिक चरण में ले गया है, जिसका असर आने वाले दिनों में अदालत और राजनीति-दोनों पर दिखाई दे सकता है।