नई दिल्ली: रेलवे बोर्ड ने भ्रष्टाचार, गंभीर कदाचार या अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना कर रहे कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए निर्देशों के तहत ऐसे कर्मचारी अब केवल VRS लेकर कार्रवाई से नहीं बच सकेंगे। यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ गंभीर आरोप या जांच लंबित है, तो पहले उस मामले का निपटारा किया जाएगा और उसके बाद ही VRS पर निर्णय लिया जाएगा।
रेलवे बोर्ड का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य अनुशासन बनाए रखना, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना और दोषी कर्मचारियों को जवाबदेह बनाना है। पहले कई मामलों में कर्मचारी VRS लेकर विभागीय कार्रवाई से बच निकलते थे, जिससे जांच प्रभावित होती थी।
नई व्यवस्था के तहत संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की गई है ताकि ऐसे मामलों में अनावश्यक देरी न हो और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। रेलवे बोर्ड का मानना है कि इस फैसले से रेलवे प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूती मिलेगी।