पूर्व विधानसभा अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ शासन प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र, जीएसटी के बाद टर्मिनल टैक्स को बताया असंवैधानिक
भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई द्वारा उद्योगों से सीमाकर/निर्यात कर (टर्मिनल टैक्स) की वसूली को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं वरिष्ठ भाजपा नेता प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने इस मुद्दे पर राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर निगम के नोटिसों पर तत्काल हस्तक्षेप और रोक लगाने की मांग की है।
प्रेम प्रकाश पाण्डेय ने इस मामले को संवैधानिक, कानूनी और औद्योगिक हितों से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए कहा कि जीएसटी लागू होने के सात साल बाद भी नगर निगम द्वारा टर्मिनल टैक्स की मांग न केवल अवैध है, बल्कि इससे प्रदेश की औद्योगिक छवि को गहरा नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने इस पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और वित्त मंत्री ओपी चौधरी को भी भेजी है।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि नगर निगम भिलाई ने अपने क्षेत्र में संचालित लगभग 50 से 60 लघु एवं मध्यम उद्योगों को सीमाकर/निर्यात कर के नोटिस जारी किए हैं। इन नोटिसों में वर्ष 2017–18 से 2024-25 तक की अवधि के लिए लाखों से करोड़ों रुपये तक की मांग की गई है, जिससे उद्योगों में भय और असमंजस का माहौल बन गया है।
नगर निगम ने इन नोटिसों में छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 173 तथा मध्यप्रदेश नगर पालिका सीमा से निर्यातित वस्तुओं पर टर्मिनल टैक्स नियम, 1996 (नियम 4 और 7) का हवाला दिया है।
पाण्डेय ने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि:-
1 जुलाई 2017 से पूरे देश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू हो चुका है।
संविधान के 101वें संशोधन अधिनियम, 2016 के बाद अनुच्छेद 246 और 269 के तहत वस्तुओं के उत्पादन, बिक्री, आपूर्ति और परिवहन पर कर लगाने का अधिकार केवल केंद्र और राज्य सरकारों को है।
उन्होंने कहा कि ऐसे में नगर निगम द्वारा टर्मिनल टैक्स वसूली अब कानूनी रूप से अप्रभावी हो चुकी है और इसका कोई संवैधानिक आधार नहीं बचता।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडे ने इसे संविधान के अनुच्छेद 265 का सीधा उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि “किसी भी प्रकार का कर केवल विधि द्वारा ही लगाया जा सकता है”, जबकि जीएसटी व्यवस्था लागू होने के बाद नगर निगमों को अलग से सीमाकर लगाने का अधिकार समाप्त हो चुका है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जीएसटी लागू होने के बाद नगर निकायों को क्षतिपूर्ति के रूप में जीएसटी राजस्व का हिस्सा दिया जाता है, ताकि उनके वित्तीय अधिकार सुरक्षित रहें। संविधान के अनुच्छेद 243X के तहत नगर निकायों के लिए वैकल्पिक वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था पहले से मौजूद है।
प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने कहा कि सीमा कर की यह वसूली-उद्योगों के उत्पीड़न का कारण बन रही है, निवेशकों का भरोसा कमजोर कर रही है, रोजगार सृजन पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है और छत्तीसगढ़ की उद्योग-अनुकूल छवि को नुकसान पहुंचा रही है उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसे मामलों पर तत्काल रोक नहीं लगी, तो इसका असर भविष्य के निवेश प्रस्तावों पर भी पड़ेगा।
पत्र के माध्यम से प्रेम प्रकाश पाण्डेय ने मुख्य सचिव से निम्नलिखित मांगें की हैं-
1. नगर निगम भिलाई द्वारा जारी सभी सीमाकर नोटिसों की तत्काल जांच और विधिक समीक्षा।
2. नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा स्पष्ट शासनादेश जारी कर नगर निगमों को ऐसे कर लगाने से रोकना।
3. अंतिम निर्णय तक सीमाकर की वसूली पर पूर्ण रोक।
4. उद्योगों और फैक्ट्रियों पर दंडात्मक कार्रवाई, सीलिंग या दबाव की किसी भी कार्रवाई पर प्रतिबंध।
इस पत्र के बाद अब निगाहें राज्य सरकार और नगरीय प्रशासन विभाग के फैसले पर टिकी हैं। उद्योग जगत को उम्मीद है कि सरकार संवैधानिक प्रावधानों और जीएसटी व्यवस्था के अनुरूप जल्द स्पष्ट निर्णय लेकर निगम की कार्रवाई पर विराम लगाएगी।