अमेरिकी राष्ट्रपति ने जेलेंस्की से कहा- रूस के डीजल ठिकानों को निशाना न बनाएं; यूक्रेन ने मांगी ठोस गारंटी, वैश्विक डीजल आपूर्ति पर बढ़ा दबाव
नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर लगातार हो रहे हमलों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन को बड़ा संदेश दिया है। ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से रूस की डीजल उत्पादन इकाइयों और तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाना बंद करने को कहा है। उनका कहना है कि रूसी ईंधन उत्पादन पर हमलों से वैश्विक डीजल आपूर्ति प्रभावित हो रही है और इसका असर दुनिया भर में ईंधन की कीमतों पर पड़ रहा है।
ट्रंप ने आयरलैंड में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि यूक्रेन को रूस में दूसरे सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की स्वतंत्रता हो सकती है, लेकिन डीजल और रिफाइनरी ढांचे पर हमले रोकने चाहिए। उनका तर्क है कि रूस से डीजल की आपूर्ति बाधित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
रूस की रिफाइनरियों पर यूक्रेन के लगातार हमले
यूक्रेन पिछले कई महीनों से रूस की तेल और गैस से जुड़ी बुनियादी संरचनाओं पर ड्रोन हमले कर रहा है। इन हमलों से रूस की रिफाइनिंग क्षमता और घरेलू ईंधन आपूर्ति पर असर पड़ा है। रूस को कुछ क्षेत्रों में पेट्रोल की कमी और ईंधन के लिए लंबी कतारों जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा है।
यूक्रेन का तर्क है कि रूस का ऊर्जा क्षेत्र उसके युद्ध प्रयासों को आर्थिक और ईंधन संबंधी आधार देता है, इसलिए ऐसे ठिकाने उसके लिए महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं। वहीं रूस इन हमलों को अपनी ऊर्जा और आर्थिक व्यवस्था पर हमला मानता है।
ट्रंप ने ईंधन संकट के लिए रूस-यूक्रेन युद्ध को बताया जिम्मेदार
अमेरिकी राष्ट्रपति ने वैश्विक डीजल संकट को लेकर मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष के प्रभाव को कमतर बताते हुए रूस-यूक्रेन युद्ध की ओर ध्यान खींचा है। ट्रंप के अनुसार रूस की रिफाइनरियों पर हमलों के कारण वहां से ईंधन का बाजार तक पहुंचना मुश्किल हुआ है और इसका असर अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति पर पड़ रहा है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के आकलन के अनुसार वैश्विक डीजल आपूर्ति में कमी के पीछे केवल यूक्रेन के हमले नहीं हैं। रूस की रिफाइनिंग व्यवस्था में व्यवधान के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र से ईंधन निर्यात में आई भारी गिरावट ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है।
क्या रूस-यूक्रेन के बीच ऊर्जा संघर्ष पर लगेगा विराम?
14 सितंबर को ट्रंप ने दावा किया कि रूस और यूक्रेन एक-दूसरे के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने पर सहमत हुए हैं। लेकिन इस दावे की स्थिति तत्काल स्पष्ट नहीं हुई। यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि किसी भी ऐसे कदम के लिए उन्हें रूस की ओर से ठोस और विश्वसनीय आश्वासन चाहिए।
जेलेंस्की का कहना है कि यूक्रेन तभी अपने हमले रोकने पर विचार करेगा, जब यह सुनिश्चित हो कि रूस भी यूक्रेन की महत्वपूर्ण ऊर्जा और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना नहीं बनाएगा। यानी ट्रंप की घोषणा के बावजूद दोनों देशों के बीच भरोसे का संकट अभी कायम है।
रूस ने ट्रंप के बयान का किया स्वागत
क्रेमलिन ने ट्रंप के यूक्रेन से रूसी डीजल ढांचे पर हमले रोकने के आह्वान का स्वागत किया है। रूस का कहना है कि आर्थिक और नागरिक ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाए जाने से वैश्विक ऊर्जा बाजार की अस्थिरता बढ़ती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने रूस-यूक्रेन युद्ध को सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित रहने के बजाय वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा से जोड़ दिया है। रिफाइनरियों और ईंधन आपूर्ति पर हमलों का असर रूस के घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिखाई दे रहा है।
आगे क्या होगा?
अब नजर इस बात पर है कि क्या अमेरिका की मध्यस्थता से रूस और यूक्रेन ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने के किसी वास्तविक और टिकाऊ समझौते तक पहुंचते हैं। यूक्रेन रूस की ओर से ठोस गारंटी चाहता है, जबकि रूस ट्रंप के आह्वान का समर्थन कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में ऊर्जा ठिकानों पर हमलों में कमी आती है या संघर्ष फिर तेज होता है, इसका सीधा असर वैश्विक ईंधन बाजार पर पड़ सकता है।