यूक्रेन युद्ध का गर्भवती महिलाओं पर गहरा असर, समय से पहले जन्म के मामले बढ़े
रूस-यूक्रेन युद्ध का असर सिर्फ मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन पर भी गंभीर रूप से पड़ रहा है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, युद्धग्रस्त इलाकों में गर्भवती महिलाओं के बीच समय से पहले प्रसव (प्री-टर्म बर्थ), आपातकालीन सिजेरियन और गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, कुछ फ्रंटलाइन क्षेत्रों में समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या युद्ध शुरू होने के बाद लगभग दोगुनी हो गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हवाई हमलों का खतरा, विस्थापन, तनाव, स्वास्थ्य सुविधाओं तक सीमित पहुंच और भविष्य को लेकर अनिश्चितता गर्भवती महिलाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। डॉक्टरों के अनुसार, अत्यधिक तनाव का सीधा संबंध गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं और समयपूर्व प्रसव से है।
कई महिलाओं को बमबारी के बीच अस्पताल पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ क्षेत्रों में प्रसव के लिए भूमिगत शेल्टरों और अस्थायी चिकित्सा केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है। स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि युद्ध के कारण मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं पर भी भारी दबाव पड़ा है।
संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को सहायता पहुंचाने के प्रयास कर रही हैं, लेकिन लगातार जारी संघर्ष राहत कार्यों के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है।