सरकार बदलने के साथ सार्वजनिक परिवहन की पहचान भी बदली, बसों के रंग को लेकर फिर तेज हुई राजनीतिक बहस
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति का असर अब सरकारी बसों के रंग पर भी साफ दिखाई देने लगा है। लंबे समय तक वाम मोर्चा (लेफ्ट फ्रंट) के शासन में सरकारी बसें लाल रंग में नजर आती थीं। 2011 में ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनने के बाद बसों को नीले-सफेद रंग में रंगा गया। अब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद सरकारी बसों पर भगवा रंग की नई पहचान देखने को मिल रही है।
राजनीति के साथ बदलती रही रंग योजना
बंगाल में सरकारी इमारतों और सार्वजनिक परिवहन के रंग वर्षों से राजनीतिक बदलाव का प्रतीक माने जाते रहे हैं। लेफ्ट शासन के दौरान लाल रंग प्रमुख था, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने नीला-सफेद रंग को अपनी पहचान बनाया। अब नई सरकार के साथ बसों का रंग भगवा किया जा रहा है, जिसे राजनीतिक बदलाव के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
रंग बदलने के फैसले को लेकर विपक्ष ने सरकार पर राजनीतिक प्रतीकों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। वहीं सरकार का कहना है कि यह केवल नई ब्रांडिंग और नई पहचान का हिस्सा है।
जनता की राय
इस बदलाव पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे नई सरकार की पहचान बता रहे हैं, जबकि कई नागरिकों का कहना है कि बसों का रंग नहीं, बल्कि उनकी समय पर उपलब्धता, साफ-सफाई और बेहतर सेवा ज्यादा महत्वपूर्ण है।