जंगल, झरने और जनजातीय संस्कृति से बदलेगी बस्तर की तस्वीर, पर्यटन से गांवों में खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते…

होमस्टे से सीधे ग्रामीण परिवारों तक पहुंचेगा पर्यटन का लाभ, इको-टूरिज्म और एडवेंचर गतिविधियों को मिल रहा बढ़ावा

रायपुर। छत्तीसगढ़ का बस्तर अब अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक कला और स्थानीय आतिथ्य के जरिए पर्यटन के नए केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। पर्यटन के विस्तार के साथ होमस्टे, इको-टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय उद्यमिता के अवसर भी बढ़ रहे हैं। इसका सीधा लाभ स्थानीय परिवारों, युवाओं, कारीगरों, कलाकारों और छोटे कारोबारियों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यटन को केवल घूमने-फिरने तक सीमित न रखकर स्थानीय रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। बस्तर में प्रकृति और संस्कृति का ऐसा संगम है, जहां चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, कुटुमसर और कैलाश गुफाएं, मां दंतेश्वरी मंदिर, दलपत सागर और बस्तर पैलेस जैसे स्थल पर्यटकों को प्रकृति, रोमांच, अध्यात्म और इतिहास का अनुभव कराते हैं।

होमस्टे से गांवों तक पहुंचेगा पर्यटन का पैसा

बस्तर में ग्रामीण और जनजातीय होमस्टे को पर्यटन विकास की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में विकसित किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30 के तहत पर्यटकों को स्थानीय परिवारों के बीच रहकर ग्रामीण जीवन, जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और स्थानीय कला को करीब से जानने का अवसर देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

इस मॉडल की खासियत यह है कि पर्यटक केवल किसी होटल में ठहरने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके खर्च से स्थानीय स्तर पर कई तरह के रोजगार पैदा होते हैं। भोजन, स्थानीय गाइड, परिवहन, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े लोगों को भी आय का अवसर मिलता है।

बस्तर में नए कमरे के निर्माण पर प्रति कमरा 1 लाख रुपये और पहले से बने कमरे के नवीनीकरण पर 50 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान बताया गया है। एक से नौ कमरों तक सहायता की व्यवस्था के जरिए ग्रामीण परिवारों को अपनी क्षमता के अनुसार पर्यटन गतिविधियों से जुड़ने का अवसर दिया जा रहा है। वर्तमान में 85 हितग्राहियों के अनुदान प्रस्ताव बैंकों को भेजे जा चुके हैं, जबकि 27 होमस्टे छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड में पंजीकृत हैं।

जनजातीय संस्कृति बनी पर्यटन की बड़ी ताकत

बस्तर की पहचान उसकी जीवंत जनजातीय संस्कृति से भी जुड़ी है। बेलमेटल और धातु शिल्प, लकड़ी और बांस की कला, पारंपरिक आभूषण, लोकनृत्य, संगीत और स्थानीय खान-पान पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं।

बस्तर पंडुम 2026 में जनजातीय संस्कृति की 12 विधाओं को मंच मिला और करीब 55 हजार आदिवासी लोगों की सहभागिता हुई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति में आयोजित इस आयोजन ने बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने का अवसर दिया।

धुड़मारास में एडवेंचर टूरिज्म की नई संभावनाएं

बस्तर में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के साथ इको-टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म पर भी जोर दिया जा रहा है। कांगेर घाटी और धुड़मारास जैसे क्षेत्र प्रकृति आधारित पर्यटन के लिए नए अवसर उपलब्ध करा रहे हैं।

धुड़मारास में एडवेंचर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ग्लास ब्रिज और कैनोपी वॉक जैसी सुविधाओं की योजना का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा धुड़मारास गांव का यूएन टूरिज्म के बेस्ट टूरिज्म विलेज डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए चयन ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को रेखांकित करता है।

युवाओं के लिए प्रशिक्षण और रोजगार

पर्यटन विकास को स्थानीय युवाओं के कौशल से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। बस्तर के पर्यटन रोडमैप के तहत 45 युवाओं को पर्यटन प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया है।

पर्यटन बढ़ने के साथ स्थानीय गाइड, ड्राइवर, होमस्टे संचालक, भोजन सेवा, हस्तशिल्प विक्रेता, सांस्कृतिक कलाकार और एडवेंचर टूरिज्म से जुड़े युवाओं के लिए आय के नए अवसर बन रहे हैं।

कनेक्टिविटी के साथ बदल रही बस्तर की तस्वीर

बस्तर के पर्यटन विकास में बेहतर कनेक्टिविटी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सड़क और हवाई संपर्क के विस्तार के साथ पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान बनाने के प्रयास जारी हैं। होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन गांवों को पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़ रहे हैं, वहीं बस्तर पंडुम जैसे आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक मंच दे रहे हैं।

बस्तर में पर्यटन का यह मॉडल प्रकृति संरक्षण, जनजातीय संस्कृति और स्थानीय आर्थिक अवसरों को एक साथ जोड़ने पर केंद्रित है। प्राकृतिक सुंदरता, जलप्रपात, जंगल, गुफाएं, जनजातीय परंपराएं, हस्तशिल्प और स्थानीय आतिथ्य मिलकर बस्तर को छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर एक अलग पहचान दे रहे हैं।

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