गंगरेल में 64 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी की आवक, सुबह 10 गेटों से 54,950 क्यूसेक छोड़ा गया; मुरुमसिल्ली 100 फीसदी भरा
धमतरी। धमतरी जिले में लगातार हो रही बारिश से प्रमुख जलाशयों में पानी की आवक तेजी से बढ़ गई है। गंगरेल, मुरुमसिल्ली, दुधावा और सोदूर जलाशयों का जलस्तर लगातार ऊपर पहुंचने के कारण जल संसाधन विभाग ने सुरक्षा और जल प्रबंधन के तहत पानी की निकासी शुरू कर दी है। 25 सितंबर की सुबह 8 बजे की स्थिति में गंगरेल जलाशय 98.14 प्रतिशत और मुरुमसिल्ली जलाशय 100 प्रतिशत भर चुका था।
गंगरेल जलाशय में उस समय 64,117 क्यूसेक पानी की आवक दर्ज की गई। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए इसके 10 गेट खोलकर 54,950 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। इसमें रुद्री बैराज के माध्यम से 6,000 क्यूसेक पानी नहर में और 48,950 क्यूसेक पानी महानदी में छोड़ा जा रहा था।
चारों प्रमुख जलाशयों में बढ़ा जलस्तर
जिले के अन्य जलाशयों की स्थिति भी लगातार गंभीर होती जा रही थी। सुबह 8 बजे के आंकड़ों के अनुसार मुरुमसिल्ली 100 प्रतिशत, दुधावा 97.21 प्रतिशत और सोदूर जलाशय 88.18 प्रतिशत भर चुका था।
मुरुमसिल्ली में 7,465 क्यूसेक पानी की आवक के मुकाबले 7,286 क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा जा रहा था। दुधावा में 18,724 क्यूसेक आवक के बीच 16,606 क्यूसेक और सोदूर जलाशय में 16,624 क्यूसेक पानी की आवक के बीच 16,402 क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा जा रहा था।
बाद में गंगरेल के सभी 14 गेट खोले गए
लगातार बढ़ती आवक के बाद दिन में स्थिति और बदली। बाद की रिपोर्टों के मुताबिक गंगरेल बांध अपनी पूरी क्षमता तक भर गया और सुरक्षा की दृष्टि से सभी 14 रेडियल गेट खोल दिए गए। इसके बाद महानदी में करीब 2.06 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी सामने आई है। जल संसाधन विभाग और प्रशासन जलस्तर तथा पानी की आवक पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
महानदी किनारे गांवों में अलर्ट
जलाशयों से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण महानदी और इससे जुड़ी नदियों का जलस्तर बढ़ने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों में अलर्ट जारी किया है। ग्रामीणों और आम नागरिकों से नदी, नालों, रपटों तथा तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने और विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है। तटीय क्षेत्रों में राजस्व और पुलिस अमले को निगरानी के निर्देश भी दिए गए हैं।
प्रशासन की नजर जलाशयों की आवक और निकासी पर बनी हुई है। बारिश और कैचमेंट क्षेत्र से पानी की आवक बढ़ने पर जल निकासी की मात्रा में बदलाव किया जा सकता है। ऐसे में महानदी के किनारे रहने वाले लोगों को प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए सतर्क रहने की जरूरत है।