झारखंड हाईकोर्ट ने कहा- मामूली आरोप पर बर्खास्तगी जैसी कठोर सजा न्यायसंगत नहीं, कर्मचारी को 50% बकाया वेतन देने का भी निर्देश।
बोकारो। झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बोकारो जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) के कर्मचारी रंजीत कुमार हिमांशु को बड़ी राहत देते हुए उनकी बर्खास्तगी रद्द कर दी है। करीब 17 वर्षों से कार्यरत इस कर्मचारी को कार्यालय से बची हुई चायपत्ती और कुछ बिस्किट घर ले जाने के आरोप में 2022 में नौकरी से निकाल दिया गया था। अदालत ने इस कार्रवाई को असंगत और अत्यधिक कठोर बताते हुए सेवा में बहाल करने का आदेश दिया है।
मामले के अनुसार, 16 मार्च 2022 को तत्कालीन उप विकास आयुक्त ने कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि कौन-सी सामग्री गायब हुई थी। कर्मचारी ने बाद में संबंधित सामग्री वापस भी कर दी, लेकिन 2 मई 2022 को उनकी सेवा समाप्त कर दी गई।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कर्मचारी की ओर से कहा गया कि कार्यालय में बची हुई चायपत्ती और बिस्किट घर ले जाने की बात स्वीकार की गई थी तथा नोटिस मिलते ही सामान लौटा दिया गया था। इसके बावजूद बिना पर्याप्त जांच और स्पष्ट आरोपों के नौकरी समाप्त कर दी गई।
मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि किसी भी कर्मचारी को दंड देते समय आरोप और सजा के बीच संतुलन होना चाहिए। यदि कथित गलती से सरकारी व्यवस्था को गंभीर नुकसान नहीं हुआ है, तो बर्खास्तगी जैसी कठोर सजा देना उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले में जारी किया गया कारण बताओ नोटिस अस्पष्ट था और अनुशासनात्मक कार्रवाई न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थी।
हाईकोर्ट ने डीआरडीए को निर्देश दिया है कि रंजीत कुमार हिमांशु को सेवा में बहाल किया जाए और उन्हें 50 प्रतिशत बकाया वेतन भी दिया जाए। अदालत का मानना है कि यह फैसला केवल एक कर्मचारी को राहत देने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान निष्पक्षता और समानुपातिक दंड के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करने के लिए भी महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा।