रायपुर-भिलाई में चाइनीज मांझे का आतंक: छात्र के गाल में 34 टांके, महिला के होंठ कटे, मजदूर का गला रेता।
भिलाई। मकर संक्रांति के पर्व पर पतंगबाजी का उत्साह एक बार फिर खूनी हादसों में बदल गया। प्रतिबंधित चाइनीज मांझे ने रायपुर और भिलाई में तीन जिंदगियों को लहूलुहान कर दिया। एक नाबालिग छात्र का चेहरा जिंदगी भर का निशान झेल सकता है, एक महिला का चेहरा खून से सन गया, वहीं एक मजदूर की जान गले पर लगी गंभीर चोट के कारण खतरे में पड़ गई।
12 वर्षीय छात्र आकाश साहू का चेहरा छलनी, गाल में लगे 34 टांके:
रायपुर के शंकर नगर इलाके में रहने वाला 12 वर्षीय आकाश साहू मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ा रहा था। इसी दौरान अचानक हवा में उड़ते चाइनीज मांझे की चपेट में आ गया। मांझा इतनी तेजी से उसके चेहरे पर लगा कि दाएं गाल पर गहरा कट पड़ गया।
परिजनों के मुताबिक,
बच्चे के गाल पर 34 टांके लगाने पड़े,
खून बहता देख मोहल्ले में अफरा-तफरी मच गई, तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने हालत को गंभीर बताया।
हालांकि आकाश अब खतरे से बाहर है, लेकिन डॉक्टरों ने आशंका जताई है कि चेहरे पर स्थायी निशान रह सकता है।
लाखेनगर में महिला रेनू वर्मा का चेहरा खून से सना, होंठ और अंगूठा कटा:
रायपुर के लाखेनगर क्षेत्र में पैदल जा रहीं रेनू वर्मा (28 वर्ष) अचानक हवा में लटकी पतंग की डोर में उलझ गईं।
यह डोर भी चाइनीज मांझे की थी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार-
मांझे ने होंठ और दाएं हाथ के अंगूठे को बुरी तरह काट दिया, चेहरे से खून बहने लगा
सड़क पर मौजूद लोग सन्न रह गए।
रेनू को तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार किया गया। खून से सना चेहरा और दर्द से कराहती महिला का दृश्य हर किसी को झकझोर गया।
भिलाई में ठेका मजदूर रामू प्रसाद का गला रेता, हालत गंभीर:
भिलाई इस्पात संयंत्र में ठेका मजदूर रामू प्रसाद (35 वर्ष) ड्यूटी खत्म कर साइकिल से घर लौट रहे थे। इसी दौरान सड़क पर लटकता चाइनीज मांझा उनके गले में फंस गया।
मांझा इतना तेज था कि गले पर गंभीर कट लग गया, खून की धार बहने लगी, मौके पर अफरा-तफरी मच गई, सहकर्मियों ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों के मुताबिक, चोट बेहद नाजुक जगह पर है और इलाज जारी है।
प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम बिक रहा चाइनीज मांझा:
छत्तीसगढ़ में चाइनीज मांझे पर न्यायालय और प्रशासन द्वारा पूर्ण प्रतिबंध है, इसके बावजूद-
रायपुर
भिलाई
इंदौर
छिंदवाड़ा
जैसे शहरों में इससे जुड़े दर्जनों हादसे सामने आ चुके हैं, कई जगह मौतें भी हो चुकी हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि-
बाजारों में चोरी-छिपे बिक्री जारी है,
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और गली-मोहल्लों में सप्लाई हो रही है,
कार्रवाई केवल त्योहारों तक सीमित रहती है।
प्रशासन हरकत में, लेकिन सवाल बरकरार:
पुलिस ने दावा किया है कि-
छापेमारी तेज की गई है
अवैध मांझा जब्त किया जा रहा है
विक्रेताओं पर कार्रवाई होगी।
लेकिन सवाल अब भी वही है-
जब जानें जा रही हैं, तब कार्रवाई क्यों?
हादसे से पहले रोकथाम क्यों नहीं?