18 साल बाद होली पर भद्रा और चंद्र ग्रहण का योग, सूतक में बदलेंगे पर्व के रीति-रिवाज: 3 मार्च को न खेलें रंग…

होली 2026 पर भद्रा काल और चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग, बदलेंगे त्योहार के नियम

त्यौहार। वर्ष 2026 की होली इस बार केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और विशेष मानी जा रही है। होली के आसपास भद्रा काल और पूर्ण चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसका सीधा प्रभाव तिथियों, सूतक काल, होलिका दहन और रंग खेलने की परंपराओं पर पड़ेगा। ज्योतिषाचार्यों ने लोगों से शास्त्रीय नियमों का पालन करने की अपील की है।

होली 2026 की तिथियां और पंचांग

होलाष्टक

आरंभ: 28 फरवरी 2026

इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे।

होलिका दहन

तिथि: 2 मार्च 2026

मुहूर्त: भद्रा काल समाप्ति से पहले शाम 5:56 बजे तक

ज्योतिषियों के अनुसार भद्रा काल के कारण देर रात तक होलिका दहन के लिए प्रतीक्षा करना अशुभ माना जाएगा।

चंद्र ग्रहण (पूर्ण ग्रहण)

स्पर्श: 3 मार्च 2026, दोपहर 3:20 बजे

पूर्ण ग्रहण: 4:39 बजे से 5:28 बजे तक

समाप्ति: शाम 6:47 बजे

यह ग्रहण भारत में पूर्ण रूप से दृश्यमान रहेगा।

रंग वाली होली (धुलंडी)

तिथि: 4 मार्च 2026

ग्रहण और सूतक समाप्ति के बाद ही होली खेलने की सलाह।

भद्रा काल और चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, होलिका दहन से पहले भद्रा काल और अगले दिन चंद्र ग्रहण का होना एक दुर्लभ संयोग है, जो लगभग 18 वर्षों बाद बन रहा है।

भद्रा काल को शास्त्रों में अशुभ और विघ्नकारी माना गया है।

चंद्र ग्रहण से चंद्रमा की शक्ति प्रभावित होती है, जिसका असर मन, भावनाओं, जल तत्व और स्त्री संबंधी विषयों पर पड़ता है।

इसी कारण इस वर्ष होली के उत्सव में संयम और सावधानी आवश्यक बताई गई है।

सूतक काल का प्रभाव

चंद्र ग्रहण से पहले सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा।

इस दौरान पूजा-पाठ, होलिका दहन, रंग खेलना और शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

विशेष रूप से 3 मार्च 2026 को होली न खेलने की सख्त सलाह दी गई है।

ज्योतिषीय प्रभाव और पंडितों की सलाह

संभावित प्रभाव

ग्रहण से चंद्र दोष बढ़ सकता है।

मन अशांत रहना, पारिवारिक तनाव, भावनात्मक असंतुलन की स्थिति बन सकती है।

भद्रा और ग्रहण के संयुक्त प्रभाव से नकारात्मक ऊर्जा का संचय संभव।

क्या करें

केवल सूखे रंग (अबीर, गुलाल) से होली खेलें।

सूतक काल में तुलसी पत्र चंद्रमा को अर्पित करें।

दान-पुण्य, मंत्र जप और ध्यान करें।

बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से सावधानी बरतने की सलाह।

क्या न करें

गीले रंग, पानी या कीचड़ का उपयोग न करें।

शराब, मांसाहार और विवाद से दूर रहें।

3 मार्च को रंग खेलने या होली कार्यक्रम आयोजित न करें।

ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि नियमों की अनदेखी से पारिवारिक कलह और मानसिक तनाव बढ़ सकता है।

क्षेत्रीय प्रभाव: छत्तीसगढ़ (रायपुर व मध्य भारत)

रायपुर सहित पूरे मध्य भारत में यह चंद्र ग्रहण स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
स्थानीय पंचांग के अनुसार:

होलिका दहन सामूहिक रूप से किया जाएगा।

प्रशासन और धर्माचार्य सूतक काल के कड़ाई से पालन की अपील कर रहे हैं।

कुल मिलाकर होली 2026 केवल उत्सव नहीं, बल्कि संयम, श्रद्धा और शास्त्रीय मर्यादा का संदेश लेकर आ रही है। ज्योतिषीय चेतावनियों को ध्यान में रखते हुए यदि परंपराओं का पालन किया जाए, तो यह पर्व सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान कर सकता है।

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