रायपुर। मध्यप्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से बच्चों समेत 16 लोगों की मौत होने की घटना के बाद अब छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी पेयजल की गुणवत्ता को लेकर चिंता गहराने लगी है। शहर के कई इलाकों में पेयजल पाइप लाइनें नालों और सीवर के पास से गुजर रही हैं, जिससे पानी के दूषित होने का खतरा बना हुआ है।
नालों के समानांतर बिछी हैं पाइप लाइनें, रायपुर नगर निगम क्षेत्र के टिकरापारा, शंकर नगर, पंडरी, पुरानी बस्ती, गुढ़ियारी, भनपुरी और तेलीबांधा जैसे इलाकों में कई जगहों पर पेयजल पाइप लाइनें नालों और सीवर लाइनों के बेहद करीब देखी जा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लीकेज या प्रेशर कम होने की स्थिति में सीवर का गंदा पानी पाइपलाइन में मिल सकता है, जो गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
गौरतलब है कि पहले इंदौर में दूषित पानी के कारण 16 मौतें हो चुकी है कई अन्य अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं, वहीं ताजा मामले में गुजरात गांधीनगर में 104 से ज्यादा बच्चे बड़े बीमार हुए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। इसी घटना के बाद रायपुर में भी स्वास्थ्य और पेयजल व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इस मामले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि नगरीय निकायों और पंचायत क्षेत्रों में पेयजल की नियमित जांच नहीं हो रही, जिससे आम जनता की सेहत खतरे में है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा-इंदौर जैसी घटना छत्तीसगढ़ में न हो, इसके लिए सरकार को तुरंत सभी नगर निगम, नगर पालिका और पंचायतों में पेयजल की गुणवत्ता की जांच करानी चाहिए। कांग्रेस ने मांग की है कि
नगर निगम रायपुर, नगर पालिकाओं, और ग्राम पंचायतों में सप्लाई किए जा रहे पानी के नमूनों की लैब जांच कराई जाए और जहां पाइप लाइनें नालों के पास से गुजर रही हैं, वहां तुरंत सुधार कार्य किया जाए।
सूत्रों के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को भी सतर्क किया गया है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो हैजा, पीलिया, टाइफाइड और डायरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बारिश के मौसम में नालों का पानी ओवरफ्लो होता है, ऐसे में पाइपलाइन से गंदा पानी घरों तक पहुंचने की आशंका बनी रहती है। इंदौर की घटना के बाद रायपुर में यह सवाल और भी तेज हो गया है कि क्या शहर की पेयजल व्यवस्था सच में सुरक्षित है?