रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को जेल से रिहा कर दिया गया है, जबकि इसी मामले में पूर्व आबकारी मंत्री और वरिष्ठ आदिवासी नेता कवासी लखमा अब भी जेल में बंद हैं। इसे लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है।
हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद 3 जनवरी 2026 को चैतन्य बघेल रायपुर सेंट्रल जेल से बाहर आए। इस दौरान भूपेश बघेल स्वयं जेल पहुंचे और बेटे को रिसीव किया। जेल के बाहर कांग्रेस नेताओं और समर्थकों की भीड़ जुटी रही।
भूपेश बघेल ने कहा-यह लड़ाई न्याय की थी। सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं। राजनीतिक बदले की भावना से मेरे परिवार को निशाना बनाया गया।
वहीं चैतन्य बघेल की रिहाई पर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर हमला बोला। भाजपा नेताओं ने कहा कि कांग्रेस सिर्फ अपने परिवार की चिंता कर रही है, जबकि आदिवासी नेता कवासी लखमा को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा-जमानत मिलने का मतलब दोषमुक्त होना नहीं है। जांच अभी जारी है। कांग्रेस ने अपने नेता कवासी लखमा को अकेला छोड़ दिया।
भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। सिंहदेव ने कहा आज की भाजपा सरकार बिना दोष साबित हुए लोगों को जेल में डाल रही है। यह न्याय नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल कवासी लखमा को लेकर उठ रहा है। वे कांग्रेस के बड़े आदिवासी चेहरा और भूपेश सरकार में आबकारी मंत्री रह चुके हैं। फिलहाल वे जेल में बंद हैं और उन्हें अब तक जमानत नहीं मिली है।
कांग्रेस का कहना है कि लखमा के खिलाफ भी ठोस सबूत नहीं हैं, जबकि भाजपा का दावा है कि जांच में गंभीर तथ्य सामने आए हैं।
चैतन्य बघेल की रिहाई और कवासी लखमा की जेल में मौजूदगी ने छत्तीसगढ़ की सियासत को फिर से दो ध्रुवों में बांट दिया है। एक ओर कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रताड़ना बता रही है, तो दूसरी ओर भाजपा भ्रष्टाचार पर कार्रवाई का दावा कर रही है। आने वाले दिनों में यह मामला न सिर्फ अदालतों में, बल्कि राजनीतिक मंचों पर भी बड़ा मुद्दा बना रहने वाला है।