वर्षों से जुटाया घरेलू सामान साथ ले जाना मुश्किल हुआ तो परिवारों ने मौके पर ही शुरू कर दी बिक्री, आसपास की बस्तियों से खरीदारी करने पहुंचे लोग
जम्मू, 17 सितंबर 2026। जम्मू के नरवाल इलाके में रोहिंग्या बस्ती को खाली कराने की प्रक्रिया के बीच बुधवार को वहां का नजारा किसी अस्थायी बाजार जैसा दिखाई दिया। जगह खाली करने के आदेश के बाद कई परिवार अपनी झुग्गियां तोड़कर सामान समेटने में जुटे रहे, वहीं आसपास के कासिम नगर और राजीव नगर से लोग घरेलू सामान खरीदने के लिए बस्ती में पहुंचते रहे।
बस्ती में दिनभर घरेलू सामान की खरीद-फरोख्त होती रही। किसी ने करीब 4 हजार रुपये में कूलर, तो किसी ने 7 हजार रुपये में फ्रिज खरीदा। वहीं कुछ परिवारों ने करीब 15 हजार रुपये में एसी और 12 हजार रुपये में एलसीडी तक बेची। छोटे रैक और दूसरे घरेलू सामान की कीमत करीब 200 से 500 रुपये के बीच बताई गई।
वर्षों में धीरे-धीरे जुटाया था सामान
बस्ती की निवासी रुखसार ने बताया कि उनका परिवार वर्ष 2014 से यहां रह रहा था। इतने वर्षों में जरूरत के हिसाब से धीरे-धीरे घर का सामान जुटाया गया। कभी फ्रिज खरीदा गया तो कभी कूलर। अब अचानक जगह खाली करने का आदेश मिलने के बाद इतना सामान अपने साथ ले जाना संभव नहीं है, इसलिए उसे बेचने का रास्ता अपनाना पड़ा।
आसपास के लोग खरीदने पहुंचे
कासिम नगर से सामान खरीदने पहुंचीं चंपा कुमारी ने बताया कि उन्हें बस्ती खाली होने की जानकारी मिली तो वह फ्रिज और कूलर खरीदने पहुंचीं। उनके साथ आसपास के अन्य लोग भी घरेलू सामान देखने और खरीदने के लिए पहुंचे। उन्होंने बताया कि मौके पर एसी और एलसीडी जैसे सामान भी बिकते देखकर उन्हें हैरानी हुई।
40 कनाल जमीन पर बनी थी बस्ती
नरवाल में प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान करीब 40 कनाल जमीन पर बनी बस्ती खाली कराई जा रही है। दूसरी रिपोर्टों के अनुसार यहां करीब 7 हजार रोहिंग्या रह रहे थे। जमीन मालिकों को नोटिस दिए जाने के बाद परिवारों ने अपनी झुग्गियां और सामान हटाना शुरू किया। प्रशासन की कार्रवाई का असर अब जमीन पर साफ दिखाई दे रहा है।
सामान की बिक्री ने खड़े किए कई सवाल
बस्ती खाली होने के दौरान एसी, फ्रिज, कूलर और एलसीडी जैसे सामान सामने आने से यह सवाल भी उठा कि लंबे समय से वहां रह रहे परिवारों ने ये घरेलू सामान किस तरह जुटाए और उनकी आय के स्रोत क्या थे। अमर उजाला की रिपोर्ट में इस पहलू पर भी सवाल उठाया गया है कि यदि इन परिवारों की स्थिति को लेकर प्रशासन और स्थानीय स्तर पर जानकारी थी, तो उन्हें लंबे समय तक काम और रहने की जगह कैसे मिलती रही।
फिलहाल नरवाल में झुग्गियां हटाने और परिवारों के वहां से निकलने की प्रक्रिया जारी है। दूसरी रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि प्रशासन की कार्रवाई के बाद इन परिवारों का अगला ठिकाना क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।