वेस्ट बंगाल। वेस्ट बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार 37 ऐसी सीटें चर्चा में हैं, जिन्हें “बेलवेदर सीट” कहा जाता है-यानी ये सीटें अक्सर बताती हैं कि आखिरकार सरकार किसकी बनेगी।
क्या है इन 37 सीटों की खासियत?
ये सीटें पिछले कई दशकों से रिजल्ट का ट्रेंड तय करती रही हैं
1977 से अब तक देखा गया है कि
जिस पार्टी ने इन सीटों में अच्छा प्रदर्शन किया वही राज्य में सरकार बनाने में सफल रही।
क्यों मानी जाती हैं ‘किंगमेकर’?
ये सीटें अलग-अलग क्षेत्रों और वोटर वर्गों का प्रतिनिधित्व करती हैं जैसे
शहरी + ग्रामीण + सीमावर्ती + अल्पसंख्यक बहुल इलाके-सबका मिश्रण, इसलिए इन्हें पूरा बंगाल का मिनी मॉडल माना जाता है।
किन सीटों पर खास नजर?
रिपोर्ट के मुताबिक कुछ प्रमुख सीटें जो ट्रेंड सेट करती रही हैं:
भवानीपुर, डायमंड हार्बर और ऐसी ही कई अन्य रणनीतिक सीटें
इस बार मुकाबला इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि
मुख्य लड़ाई तृणमूल कांग्रेस वर्सेस भारतीय जनता पार्टी के बीच है।
लेकिन सवाल ये है कि क्या पुराना ट्रेंड जारी रहेगा या इस बार समीकरण बदलेंगे?
आसान भाषा में समझें तो अगर कोई पार्टी इन 37 सीटों में बढ़त लेती है तो बहुत संभावना है कि वही पूरे बंगाल में सरकार बनाए