बीजापुर। नक्सल प्रभावित बीजापुर जिला में नगरपालिका की बुलडोजर कार्रवाई एक बड़े विवाद का रूप ले चुकी है। न्यू बस स्टैंड क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण हटाने के नाम पर 15-16 जनवरी 2026 को हुई कार्रवाई में डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) के एक दंपती का घर भी ढहा दिया गया। इस कार्रवाई से प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के बेघर कर दिया गया, जबकि गांव लौटने पर नक्सलियों से जान का खतरा बना हुआ है।
बीजापुर शहर के न्यू बस स्टैंड, बीजापुर के पीछे सरकारी भूमि पर बने 75 से अधिक अवैध मकानों को हटाने के लिए नगरपालिका ने भारी पुलिस बल के साथ अभियान चलाया। पहले चरण में करीब 20 मकान जमींदोज कर दिए गए हैं, जबकि शेष पर कार्रवाई जारी है। यह कार्रवाई नगरपालिका अध्यक्ष बी. एल. नुरेटी और तहसीलदार पंचराम सलामे की निगरानी में हुई। प्रशासन का कहना है कि भूमि लंबे समय से अतिक्रमण में थी और इसे मुक्त कराना जरूरी था।
ग्रामीणों के मुताबिक, वे 2022 से यहां रह रहे थे और इसे अपेक्षाकृत सुरक्षित क्षेत्र मानते थे। कड़ाके की ठंड के बीच अचानक बुलडोजर चलने से कई परिवारों को घर का सामान तक निकालने का समय नहीं मिला।
ग्रामीणों की आपबीती: घर तोड़ा, अब जाएं तो कहां? आंसुओं के साथ ग्रामीणों ने कहा, प्रशासन घर तोड़ रहा है, और अगर गांव लौटे तो नक्सली मार डालेंगे।
महिलाएं और बच्चे सड़क पर खुले आसमान के नीचे ठिठुरते नजर आए। प्रभावित परिवारों का दावा है कि कोई लिखित या मौखिक नोटिस उन्हें नहीं दिया गया, जिससे वे वैकल्पिक व्यवस्था कर पाते। DRG में तैनात दंपती के परिवार का घर टूटना लोगों के आक्रोश को और बढ़ा रहा है—ग्रामीण पूछ रहे हैं कि अगर सुरक्षाकर्मियों के परिवार सुरक्षित नहीं, तो आम नागरिक कैसे सुरक्षित रहेंगे?
प्रशासन ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दो बार नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन अतिक्रमणकारियों ने स्थान खाली नहीं किया। नगरपालिका का तर्क है कि यह पूरी तरह कानूनी कार्रवाई है और सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराना उनकी जिम्मेदारी है। अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार की हिंसा नहीं हुई, हालांकि माहौल तनावपूर्ण रहा।
यह घटना छत्तीसगढ़ के नक्सल बेल्ट में बुलडोजर नीति पर नए सवाल खड़े कर रही है।
मानवीय पहलू: ठंड में बेघर हुए परिवारों की तत्काल पुनर्वास/राहत की मांग तेज।
सुरक्षा चिंता: गांव लौटने पर नक्सली खतरे की आशंका, शहर में वैकल्पिक ठिकाने का अभाव।
राजनीतिक/सामाजिक प्रतिक्रिया: स्थानीय स्तर पर प्रदर्शन और ज्ञापन की तैयारी।
ग्रामीणों का कहना है कि नोटिस, पुनर्वास और समयबद्ध मानवीय व्यवस्था के बिना ऐसी कार्रवाई नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति को और संवेदनशील बना सकती है।
कुल मिलाकर बीजापुर की यह बुलडोजर कार्रवाई केवल अतिक्रमण हटाने का मामला नहीं रह गई है, बल्कि सुरक्षा, मानवाधिकार और प्रशासनिक संवेदनशीलता की कसौटी बन गई है। अब निगाहें इस पर हैं कि प्रशासन बेघर परिवारों के पुनर्वास और सुरक्षा आश्वासन को लेकर क्या ठोस कदम उठाता है।