भाजपा सरकार ने समान नागरिक संहिता, धर्मांतरण विरोधी कानून और प्रशासनिक सुधारों पर तेज़ी से बढ़ाया कदम; ममता बनर्जी के दौर के बाद नई राजनीतिक दिशा देने का दावा।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में 15 वर्षों बाद बड़ा बदलाव देखने को मिला है। विधानसभा चुनाव में जीत के बाद भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनने के साथ ही मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने राज्य में नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत का संकेत दिया है। नई सरकार ने सत्ता संभालते ही कई नीतिगत फैसलों और प्रशासनिक बदलावों के जरिए अपनी अलग कार्यशैली का संदेश देने की कोशिश की है।
सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाने, धर्मांतरण विरोधी कानून लाने, कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और भ्रष्टाचार पर सख्ती जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी है। इसके साथ ही सरकारी योजनाओं की समीक्षा, नौकरशाही में जवाबदेही बढ़ाने और केंद्र सरकार की नीतियों के साथ बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया जा रहा है।
भाजपा का कहना है कि उसकी सरकार विकास, सुशासन और पारदर्शिता के एजेंडे पर काम करेगी, जबकि विपक्ष का आरोप है कि नई सरकार राज्य की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान बदलने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा में भी बड़ा परिवर्तन है। आने वाले महीनों में नई सरकार के फैसले और उनके प्रभाव यह तय करेंगे कि यह बदलाव कितना स्थायी साबित होता है।