निगम आयुक्त पर वित्तीय अनियमितता और टेंडर नियमों में बदलाव का आरोप
महापौर ने सचिव को लिखी शिकायत, निलंबन की मांग; आयुक्त बोलीं- सब कुछ नियमों के तहत
रिसाली। रिसाली नगर निगम में प्रशासनिक स्तर पर टकराव खुलकर सामने आ गया है। नगर निगम आयुक्त मोनिका वर्मा पर वित्तीय अनियमितता और टेंडर नियमों में मनमाने बदलाव के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले में महापौर ने नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव को लिखित शिकायत भेजते हुए आयुक्त के निलंबन और जांच की मांग की है।
महापौर की ओर से दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आयुक्त द्वारा निगम में बजट स्वीकृति के बिना खर्च किए गए।
टेंडर नियमों में बदलाव कर प्रक्रिया प्रभावित की गई।
जल उपचार संयंत्र (वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट) तीन वर्षों से बंद होने के बावजूद भुगतान और प्रक्रिया दिखाया गया।
स्वास्थ्य अधिकारी की नियुक्ति नियमों को दरकिनार कर किया गया।
कुछ ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया।
महापौर का कहना है कि इस तरह के निर्णयों से नगर निगम की पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
महापौर ने अपनी शिकायत में स्पष्ट रूप से लिखा है कि-
यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो निगम की कार्यप्रणाली पर जनता का भरोसा कमजोर होगा। इसी आधार पर आयुक्त मोनिका वर्मा के तत्काल निलंबन की मांग की गई है।
इन आरोपों पर निगम आयुक्त मोनिका वर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि-
निगम में किया गया हर कार्य नियमों और अधिकारों के तहत है।
किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता नहीं की गई। टेंडर प्रक्रिया में बदलाव तकनीकी और प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार किया गया। जल उपचार संयंत्र को लेकर तकनीकी दिक्कतें हैं, लेकिन कोई गड़बड़ी नहीं हुई। स्वास्थ्य अधिकारी की नियुक्ति भी नियमों के दायरे में की गई है।
आयुक्त ने आरोपों को राजनीतिक दबाव और गलतफहमी का परिणाम बताया।
शिकायत मिलने के बाद नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा-
वित्तीय दस्तावेजों
टेंडर फाइलों
नियुक्ति प्रक्रिया
की जांच कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।