रायपुर। छत्तीसगढ़ में आज भी अंधविश्वास और टोनही (डायन) के संदेह में महिलाओं के साथ होने वाली प्रताड़ना गंभीर सामाजिक समस्या बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि समाज में फैले अंधविश्वास के कारण कई निर्दोष महिलाएं हिंसा, सामाजिक बहिष्कार और कभी-कभी हत्या जैसी घटनाओं का शिकार हो जाती हैं।
रायपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में अंधश्रद्धा निर्मूलन से जुड़े विशेषज्ञ डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कि जादू-टोना या टोनही जैसी मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। कई बार गांवों में बीमारी, फसल खराब होने या अन्य समस्याओं का कारण किसी महिला पर जादू-टोना का आरोप लगाकर उसे प्रताड़ित किया जाता है।
उन्होंने बताया कि देश के कई राज्यों में हर साल टोनही के संदेह में महिलाओं के साथ हिंसा की घटनाएं सामने आती हैं। अंधविश्वास के कारण महिलाओं को मारपीट, सामाजिक बहिष्कार और गांव से निकालने तक की घटनाएं होती हैं, जो मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।
डॉ. मिश्र के अनुसार, अंधविश्वास के कारण कई मामलों में परिवारों को गांव छोड़ना पड़ता है और कुछ मामलों में हत्या या आत्महत्या तक की नौबत आ जाती है। उन्होंने कहा कि बीमारियों या प्राकृतिक समस्याओं का समाधान वैज्ञानिक तरीके और चिकित्सकीय उपचार से ही संभव है, न कि तंत्र-मंत्र या झाड़-फूंक से।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान, शिक्षा और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। साथ ही, कानून का सख्ती से पालन और पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।