रायपुर। छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के खिलाफ होने वाले अपराधों को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में पिछले कुछ वर्षों में SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत हजारों मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें हत्या, मारपीट, धमकी और दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 2023 से अब तक लगभग 2,400 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से बड़ी संख्या महिलाओं के खिलाफ अपराधों से जुड़ी है और लगभग 40 प्रतिशत मामलों में दुष्कर्म से संबंधित शिकायतें दर्ज की गई हैं। यह आंकड़े राज्य में कमजोर वर्गों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कई मामलों में सामाजिक दबाव या डर के कारण शिकायत दर्ज ही नहीं हो पाती, जिससे वास्तविक संख्या और भी अधिक हो सकती है। वहीं, कई जिलों में पुलिस और प्रशासन द्वारा मामलों की जांच और कार्रवाई में तेजी लाने के लिए विशेष प्रयास भी किए जा रहे हैं।
इधर, हाल के दिनों में राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है। विपक्ष का दावा है कि राज्य में एक वर्ष में तीन हजार से अधिक दुष्कर्म के मामले दर्ज हुए, यानी औसतन हर दिन कई घटनाएं सामने आ रही हैं।
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 कमजोर वर्गों को सामाजिक भेदभाव और हिंसा से सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है। इस कानून के तहत दोषियों के खिलाफ सख्त सजा और विशेष अदालतों में त्वरित सुनवाई का प्रावधान है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, जागरूकता और त्वरित न्याय व्यवस्था से ही ऐसे अपराधों पर नियंत्रण पाया जा सकता है।