दरबार बनाम चंदा! धीरेंद्र शास्त्री के बयान से सियासी भूचाल, भूपेश बघेल का तीखा पलटवार…

आस्था। धर्म, आस्था और अंधविश्वास को लेकर देश में चल रही बहस एक बार फिर तेज हो गई है। इस बार आमने-सामने हैं बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल। दोनों के बयानों ने न सिर्फ सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि आम लोगों के बीच भी तीखी बहस छेड़ दी है।

धीरेंद्र शास्त्री ने साफ शब्दों में कहा कि:-

दरबार लगाना  अंधविश्वास नहीं है अंध विश्वास वह होता है जिसमें तर्क और चेतना ना हो चादर चढ़ाना और कैंडल जलाना विश्वास कहलाता है।

उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है, जबकि दरबार लोगों की आस्था और आत्मविश्वास से जुड़ा है।

सनातन जगाने वाला प्लेन पर नहीं बैठ सकता’ बयान बना चर्चा का केंद्र।

धीरेंद्र शास्त्री ने अपने बयान में आगे कहा कि जो सनातन को जगाने निकला हो वह किसी ऐशो आराम और प्लेन में बैठने का मोहताज नहीं होता, इस एक लाइन ने पूरे बयान को राजनीतिक और वैचारिक बहस के केंद्र में ला दिया।

धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर भूपेश बघेल ने सवाल उठाया कि जब धार्मिक आयोजनों के नाम पर लाखों-करोड़ों का चंदा इकट्ठा किया जाता है, तो फिर सादगी और त्याग की बातें कैसे की जा सकती हैं।

इस बयानबाजी के बाद एक बार फिर सवाल खड़ा हो गया है कि , क्या दरबार और धार्मिक आयोजन सिर्फ आस्था हैं, या फिर यह आस्था के नाम पर चलने वाला बड़ा सिस्टम बन चुके हैं?

समर्थक जहां धीरेंद्र शास्त्री के बयान को सनातन संस्कृति की रक्षा बता रहे हैं, वहीं आलोचक भूपेश बघेल की बातों को जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग करार दे रहे हैं।

इस पूरे प्रकरण ने साफ कर दिया है कि धर्म और सियासत के बीच की रेखा एक बार फिर धुंधली होती जा रही है। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज होने की संभावना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *