परीक्षा से पहले प्रदेश में 5 छात्रों की मौत: अलग-अलग थाना क्षेत्रों में जांच जारी…

बोर्ड परीक्षा से पहले 48 घंटे में 5 छात्र-छात्राओं की मौत, कोरबा समेत अलग-अलग थाना क्षेत्रों में घटनाएं

कोरबा/जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ में बोर्ड परीक्षाओं से ठीक पहले 48 घंटे के भीतर 5 छात्र-छात्राओं की मौत के मामलों ने प्रदेश को झकझोर दिया है। घटनाएं कोरबा जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों और जांजगीर-चांपा जिले से सामने आई हैं। पुलिस ने सभी मामलों में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

▪️ पहली घटना – कोतवाली थाना क्षेत्र

इंदिरानगर दुरपा, वार्ड नंबर-5 निवासी अंजलि केंवट (17), कक्षा 10वीं की छात्रा थी और दुरपा रोड स्थित लवली केयर स्कूल में पढ़ती थी। 17 फरवरी को घर में आत्महत्या कर ली उसने। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। परिजनों के अनुसार वह बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रही थी।

▪️ दूसरी घटना – उरगा थाना क्षेत्र

धमनागुड़ी मोहार गांव की गीता महंत (16), कक्षा 9वीं की छात्रा थी। 17 फरवरी को गांव के पास मृत अवस्था में मिली। परिजनों के अनुसार सितंबर में मां की अचानक मौत के बाद से वह परेशान रहती थी और पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। उरगा थाना प्रभारी राजेश तिवारी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।

▪️ तीसरी घटना – सिविल लाइन थाना क्षेत्र

रामपुर आईटीआई बस्ती निवासी उज्जवल डनसेना उर्फ ध्रुव (17), 12वीं कक्षा का छात्र था और एसईसीएल डीएवी पब्लिक स्कूल में पढ़ता था। 18 फरवरी को वह परीक्षा में अनुपस्थित रहा। जानकारी मिलने पर शिक्षक उसके घर पहुंचे, तब जाकर पता चला कि उसने आत्महत्या कर ली। पुलिस जांच में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

▪️ चौथी घटना – (कोरबा जिला)

एक अन्य छात्र ने भी बीते 48 घंटों में आत्मघाती कदम उठाया। जानकारी के अनुसार उसने अपने नोट में शवदान की इच्छा जताई थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

▪️ पांचवीं घटना – सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र

लछनपुर गांव की रजनी सूर्यवंशी (18), 12वीं की छात्रा थी। 18 फरवरी को घर में मृत पाई गई यह भी सुसाइड ही था। दो दिन बाद उसका बोर्ड एग्जाम था। थाना प्रभारी जयप्रकाश गुप्ता ने बताया कि प्रारंभिक जांच जारी है।

प्रदेश में 12वीं बोर्ड परीक्षा 20 फरवरी से और 10वीं की परीक्षा 21 फरवरी से शुरू हो रही है। लगातार सामने आए इन मामलों ने अभिभावकों और शिक्षा जगत में चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों से संवाद और मानसिक सहयोग बेहद जरूरी है।

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